मौद्रिक नीति में यथास्थिति बनाये रखना आर्थिक वृद्धि के लिहाज से अनूकुल: विशेषज्ञ

मौद्रिक नीति में यथास्थिति बनाये रखना आर्थिक वृद्धि के लिहाज से अनूकुल: विशेषज्ञ

मौद्रिक नीति में यथास्थिति बनाये रखना आर्थिक वृद्धि के लिहाज से अनूकुल:  विशेषज्ञ
Modified Date: November 29, 2022 / 08:14 pm IST
Published Date: April 7, 2021 1:59 pm IST

नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) रिजर्व बैंक का रेपो दर को लगतार पांचवी बार अपरिवर्तित रखना आर्थिक वृद्धि, वित्तीय बाजारों के कारोबारियों को बढ़ावा देने की आर्थिक जरूरतों के अनुरूप है। वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों ने बुधवार को यह कहा।

नये वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा में रिजर्व बैंक ने कोविड-19 मामलों के एक बार फिर से बढ़ने के बीच अर्थव्यवस्था को समर्थन देने की आवश्यकता को रेखांकित किया। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास के नेतृत्व वाली छह सदस्यी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आर्थिक वृद्धि को बनाये रखने के लिये जब तक जरूरी लगे एकमत से उदार रुख बनाये रखने का फैसला किया।

टाटा कैपिटल के एमडी एवं सीईओ राजीव सभरवाल ने कहा, ‘‘आर्थिक वृद्धि के बारे में व्यक्ति अनुमान उत्साहवर्धक है और आर्थिक गतिविधियों में और मजबूती आयेगी।’’

रिजर्व बैंक ने भारतीय अर्थव्यवसथा के चालू वित्त वर्ष के दौरान 10.5 प्रतिशत वृद्धि हासिल करने का अनुमान जताया है।

सभरवाल ने कहा कि जो उपाय घोषित किये गये हैं उनका लक्ष्य कर्ज लागत को कम करना, वित्तीय परिस्थितियों को सरल बनाना और तरलता को रिण उठाव के अनुकूल बनाये रखना है। उन्होंने कहा कि इन घोषणाओं से तरलता के जल्द समाप्ति की चिंतायें दूर होतीं हैं।

मुद्रास्फीति के मामले में रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के दौरान खुदरा मुद्रास्फीति के 4.4 से 5.2 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान व्यक्त किया है। पहली छमाही में यह पांच प्रतिशत से ऊपर रहने का अनुमान है।

डेलायट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजुमदार ने कहा, ‘‘जैसी की उम्मीद थी रिजर्व बैंक ने नीतिगत दर को स्थिर रखा है और मुद्रास्फीति के ऊपर जाने की स्थिति को देखते हुये दर को इसी स्तर पर बनाये रखा जा सकता है। बीच बीच में आपूर्ति पक्ष में व्यावधान खड़ा होने और धीरे धीरे मांग बढ़ने का मूल्यों पर दबाव बना रह सकता है। ’’

मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट के निवेश उत्पाद प्रभाग के प्रमुख नितिन शानभाग ने कहा कि बाजार को नीतिगत ब्याज दर में अभी कोई बदलाव न किए जाने का अनुमान था पर रिजर्व बैंक ने सरकारी प्रतिभूतियों के खुले क्रय-बिक्रय कार्यक्रम को स्पष्ट कर शांति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि इससे बांड बाजार में दीर्घकालिक यील्ड (निवेश पर प्रतिफल) की दर में स्थिरता आएगी।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एक लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां खुले बाजार से खरीदने का कार्यक्रम बनाया है। इनमें से 25,000 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियां 15 और 21 अप्रैल को नीलाम की जानी हैं।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की प्रमुख अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा कि नीतिगत दर और मौद्रिक नीति के दृष्टिकोण में परिवर्तन न करने का मौद्रिक नीति समिति का निर्णय प्रत्याशित रहा। उनकी राय में वर्तमान अनिश्चितताओं और अर्थव्यवस्था की बदलती प्रकृति के मद्देनजर नीतिगत संकेत अधिक निरंतरता प्रधान तथा सरकार-आधारित हो गए हैं।

रिजर्व बैंक ने ग्रामीण और लघु, मझौले उद्यमों में कर्ज प्रवाह को बनाये रखने के लिये सूक्ष्म वित्तीय संस्थानों में अधिक तरलता उपलब्ध कराई है। मजुमदार ने कहा कि पूंजी वयय को जारी रखने और अर्थव्यवस्था के सभी वर्गो में खर्च बढ़ाने के लिये रिण वृद्धि को तेजी से आगे बढ़ना होगा।

रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति में 2021- 22 के दौरान अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों को 50,000 करोड़ रुपये की तरलता समर्थन उपलब्ध कराने की घोषणा की है ताकि वह आगे नये कर्ज उपलब्ध करा सकें। रिजर्व बैंक नाबार्ड को 25,000 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय आवास बैंक को 10,000 करोड़ रुपये और सिडबी को 15,000 करोड़ रुपये उपलब्ध करायेगा। इससे पहले अप्रैल से अगसत 2020 के दौरान अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों को 75,000 करोड़ रुपये की पुनर्वित सुविधा उपलब्ध कराई गई।

इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने एक लाख करोड़ रुपये का सरकारी प्रतिभूति (जी सेक) अधिग्रहण कार्यक्रम की भी घोषणा की है। इसके तहत केनद्रीय बैंक खुले बाजार से सरकारी प्रतिभूतियों की खरीदारी करेगा।

मुथूट फाइनेंस के प्रबंध निदेशक जार्ज एलेक्जंडर मूथूट ने कहा कि रिजर्व बैंक की ओर से नकदी बढ़ाने के लिए किए गए उपाय तथा बैंकों द्वारा गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों रिण की सुविधा 30 दिसंबर 2021 तक बढाया जाना कर्ज सुविधाओं के प्रसार में आखिरी कड़ी के तौर पर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के महत्व का रेखांकित करते हैं।

भाषा

महाबीर मनोहर

मनोहर


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