नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने बुधवार को कहा कि उसे मध्यस्थता के दो बड़े मामलों में सफलता मिली है जिनमें मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने कुल 819.96 करोड़ रुपये की निपटान राशि उसके पक्ष में देने का आदेश दिया है।
ये मामले राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के पानीपत-जालंधर खंड से जुड़े विवादों से संबंधित थे, जिनमें टोल राजस्व के नुकसान, अनुबंध समाप्ति भुगतान और परियोजना में देरी से जुड़े खर्चों पर दावे किए गए थे।
एनएचएआई ने कहा, ‘‘दोनों मामलों में रियायतधारकों ने 8,375 करोड़ रुपये से अधिक के दावे किए थे, जबकि एनएचएआई की तरफ से 2,888.64 करोड़ रुपये के जवाबी दावे किए गए थे। सुनवाई के बाद मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने एनएचएआई के पक्ष में कुल 819.96 करोड़ रुपये की शुद्ध राशि के निपटान का आदेश दिया।’’
एनएचएआई ने कहा कि विस्तृत सुनवाई, अनुबंध प्रावधानों, तकनीकी रिकॉर्ड, साक्ष्यों और विशेषज्ञों की दलीलों की जांच के बाद न्यायाधिकरण ने उसकी कई अहम दलीलों को स्वीकार किया।
पहले मामले में 5,443 करोड़ रुपये से अधिक के दावे किए गए थे, जिनमें टोल संग्रह में कथित नुकसान, अवसर की हानि, अनुबंध समाप्ति भुगतान और कार्य-क्षेत्र में बदलाव से जुड़े विवाद शामिल थे। एनएचएआई ने इन दावों का विरोध करते हुए कहा कि अनुबंध की समाप्ति वैध थी और इसके लिए रियायतधारक की चूक जिम्मेदार थी।
दूसरे मामले में 2,931.79 करोड़ रुपये से अधिक के दावे किए गए थे, जिनमें देरी से जुड़े नुकसान, लागत में वृद्धि, परियोजना लंबी खिंचने से हुए खर्च और अन्य वित्तीय प्रभावों के लिए मुआवजा मांगा गया था। एनएचएआई ने इन दावों को अनुबंधीय आधार, पर्याप्त साक्ष्य और प्रक्रिया के अनुपालन के अभाव में खारिज करने की दलील दी।
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