सूक्ष्म उर्वरक उद्योग ने नियामकीय मंजूरी प्रक्रिया आसान बनाने की मांग की

सूक्ष्म उर्वरक उद्योग ने नियामकीय मंजूरी प्रक्रिया आसान बनाने की मांग की

सूक्ष्म उर्वरक उद्योग ने नियामकीय मंजूरी प्रक्रिया आसान बनाने की मांग की
Modified Date: September 17, 2026 / 07:39 pm IST
Published Date: September 17, 2026 7:39 pm IST

नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) सूक्ष्म उर्वरक विनिर्माताओं के संगठन आईएमएमए ने बृहस्पतिवार को सरकार से नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया सरल करने, छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और निर्यात मंजूरी में तेजी लाने का आग्रह किया, ताकि भारतीय कंपनियां विदेशी कारोबार न गंवाएं।

भारतीय सूक्ष्म-उर्वरक विनिर्माता संघ (आईएमएमए) ने कृषि मंत्रालय से डिजिलॉकर की तर्ज पर एक केंद्रीकृत डिजिटल ढांचा बनाने का अनुरोध किया, जहां लाइसेंस और संबंधित दस्तावेजों का एक बार सत्यापन हो तथा राज्य प्राधिकरण उन्हें वहां से देख सकें।

आईएमएमए के अध्यक्ष राहुल मीरचंदानी ने कहा कि फिलहाल राज्य सरकारें एक ही मंजूरी के लिए अलग-अलग दस्तावेज मांगती हैं, जिससे देरी होती है और अनुपालन लागत बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि उद्योग चाहता है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत उल्लंघनों का एक समान वर्गीकरण हो और मामूली, सुलझाए जा सकने वाले उल्लंघनों को गंभीर अपराधों से अलग रखा जाए।

मीरचंदानी ने बताया कि सरकार इस वर्गीकरण पर उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के साथ विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में उर्वरकों को आवश्यक वस्तु अधिनियम से पूरी तरह हटाए जाने की संभावना नहीं है, इसलिए अपराध की श्रेणी से बाहर करना तत्काल अधिक व्यावहारिक है।

आईएमएमए ने जैव-उत्तेजक उत्पादों के नियमन में स्पष्ट प्रयोगशाला मानकों, परीक्षण परिणामों में एकरूपता और फसल-विशिष्ट प्रावधानों की कमी का मुद्दा उठाते हुए मान्यता-प्राप्त प्रयोगशालाओं के जरिये मानकीकृत परीक्षण की मांग की।

संगठन ने निर्यात के लिए वाणिज्य मंत्रालय और विदेश व्यापार महानिदेशालय से बार-बार मंजूरी लेने के बजाय ‘नकारात्मक-सूची’ व्यवस्था लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिन उत्पादों पर सब्सिडी नहीं मिलती, घरेलू स्तर पर कमी नहीं है और जो भारत में बनते हैं, उन्हें सामान्य तौर पर निर्यात की अनुमति मिलनी चाहिए।

आईएमएमए ने जीएसटी व्यवस्था में बदलाव की भी मांग की। उसने ‘उल्टे शुल्क ढांचे’ का हवाला देते हुए कहा कि कच्चे माल पर 18 प्रतिशत कर लगता है, जबकि कुछ तैयार उत्पादों पर पांच प्रतिशत कर है।

भाषा राजेश

राजेश योगेश प्रेम

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