पश्चिम एशिया संघर्ष से कंपनियों की परिचालन लाभप्रदता में दो प्रतिशत की गिरावट संभवः क्रिसिल
पश्चिम एशिया संघर्ष से कंपनियों की परिचालन लाभप्रदता में दो प्रतिशत की गिरावट संभवः क्रिसिल
नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) पश्चिम एशिया संघर्ष लंबा खिंचने से आपूर्ति शृंखला में पैदा होने वाली बाधाएं चालू वित्त वर्ष में कंपनियों की परिचालन लाभप्रदता को दो प्रतिशत तक घटा सकती हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने सोमवार को एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया।
इसके साथ ही क्रिसिल ने संकट के संभावित असर को आंकने वाली अपनी रिपोर्ट में कहा कि बही-खाता मजबूत होने की वजह से भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र इस दौर में भी जुझारू बना रहेगा।
रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, पश्चिम एशिया संघर्ष ने कंपनियों को आपूर्ति शृंखला में बदलाव करने, मूल्य निर्धारण की चुनौतियों से निपटने, ईंधन एवं माल ढुलाई की लागत में बढ़ोतरी को संभालने और रुपये में गिरावट से जूझने के लिए मजबूर किया है।
क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक सोमशेखर वेमुरी ने कहा कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो आपूर्ति बाधाएं महंगाई को बढ़ा सकती हैं और मांग पर भी असर डाल सकती हैं।
उन्होंने कहा कि संघर्ष की तीव्रता, ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की सीमा और अवधि जैसे कारक समग्र क्रेडिट गुणवत्ता के आकलन के लिए अहम रहेंगे।
रेटिंग एजेंसी ने इस रिपोर्ट में 34 क्षेत्रों का विश्लेषण किया है जो उसकी क्रेडिट रेटिंग वाले कॉरपोरेट कर्ज का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा हैं।
क्रिसिल ने यह रिपोर्ट इस अनुमान पर तैयार की है कि पश्चिम एशिया संघर्ष से उपजी आपूर्ति बाधाएं नौ महीने तक बनी रह सकती हैं और कच्चे तेल का औसत दाम 110 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है।
क्रिसिल ने कहा कि इस स्थिति में कंपनियों की परिचालन लाभप्रदता में करीब दो प्रतिशत अंक की गिरावट आ सकती है जबकि संघर्ष से पहले का अनुमान 12 प्रतिशत था। हालांकि, कुछ क्षेत्रों की लाभप्रदता पर इसका असर ज्यादा होगा।
इसके बावजूद, मजबूत बही-खाते, स्थिर घरेलू मांग और सरकार के पूंजीगत व्यय के चलते कॉरपोरेट क्षेत्र पर कुल मिलाकर क्रेडिट गुणवत्ता का असर सीमित रहेगा।
क्रिसिल रेटिंग्स के प्रबंध निदेशक सुबोध राय ने कहा कि कंपनियों के लिए लागत और मुनाफे को संभालना, राजस्व वृद्धि हासिल करने से बड़ी चुनौती होगा।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
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