भारतीय कंपनियों पर पश्चिम एशिया संकट का असर, आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित: सीआईआई

भारतीय कंपनियों पर पश्चिम एशिया संकट का असर, आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित: सीआईआई

भारतीय कंपनियों पर पश्चिम एशिया संकट का असर, आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित: सीआईआई
Modified Date: March 22, 2026 / 03:04 pm IST
Published Date: March 22, 2026 3:04 pm IST

नयी दिल्ली, 22 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारतीय कंपनियों को माल की ढुलाई में देरी से लेकर जरूरी कच्चे माल की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने रविवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि वैश्विक व्यापार पर निर्भर कई क्षेत्रों में दबाव बढ़ रहा है।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने बयान में कहा कि इस संघर्ष के कारण समुद्री रास्तों में बाधा आ रही है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है, जिसका असर अब कंपनियों पर दिखने लगा है।

उन्होंने कहा, “भारतीय कंपनियां सामान की ढुलाई में देरी, ऊर्जा से जुड़े जरूरी संसाधनों की कमी और कई क्षेत्रों में जरूरी कच्चे माल की कमी जैसी समस्याओं का सामना कर रही हैं।”

उद्योग मंडल के मुताबिक, इन बाधाओं का असर ऊर्जा बाजार और व्यापार पर भी पड़ रहा है, जिससे आयात और निर्यात दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

उद्योग मंडल ने कहा कि इसका असर विनिर्माण और अन्य उद्योगों पर भी देखा जा रहा है।

सीआईआई ने कहा कि पश्चिम एशिया का यह संघर्ष अहम समुद्री मार्गों को प्रभावित कर रहा है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ गया है।

हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद सीआईआई का मानना है कि भारत पहले के मुकाबले ऐसे झटकों से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में है।

बनर्जी ने कहा कि देश इस दौर में मजबूत स्थिति के साथ प्रवेश कर रहा है, जिसे संरचनात्मक सुधारों और आत्मनिर्भर भारत जैसे प्रयासों से मजबूती मिली है।

उद्योग संगठन ने कहा कि सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए तेजी से और संतुलित कदम उठाए हैं। इनमें कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में विविधता लाना, एलपीजी उत्पादन बढ़ाना, निर्यात को बढ़ावा देना और मुद्रा को स्थिर रखना शामिल है।

सीआईआई के अनुसार, भारतीय उद्योग भी इन चुनौतियों के अनुसार खुद को ढाल रहा है। कंपनियां ऊर्जा के अलग-अलग स्रोतों पर जोर दे रही हैं, आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर बना रही हैं और रोजगार सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही हैं।

भाषा योगेश अजय

अजय


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