प्याज की कीमतों में उछाल के लिए बिचौलियों की मुनाफाखोरी जिम्मेदार: चौहान

प्याज की कीमतों में उछाल के लिए बिचौलियों की मुनाफाखोरी जिम्मेदार: चौहान

प्याज की कीमतों में उछाल के लिए बिचौलियों की मुनाफाखोरी जिम्मेदार: चौहान
Modified Date: August 27, 2026 / 08:02 pm IST
Published Date: August 27, 2026 8:02 pm IST

नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बृहस्पतिवार को प्याज की बढ़ती कीमतों के लिए बिचौलियों को जिम्मेदार ठहराया और इस बात पर जोर दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसानों को उचित लाभ मिले और ग्राहकों पर ऊंची कीमतों का असर न पड़े।

राष्ट्रीय राजधानी में प्याज की कीमतें 60 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंचने के बीच सरकार ने बफर स्टॉक जारी किया है। वहीं चौहान ने कृषि बाजार व्यवस्था में बिचौलियों की भूमिका की आलोचना की है।

मंत्री ने याद दिलाया कि कुछ महीने पहले केंद्र सरकार को दखल देना पड़ा था और महाराष्ट्र में किसानों से प्याज खरीदना पड़ा था क्योंकि कीमतें गिरकर 7-8 रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गई थीं, जो उत्पादन लागत को पूरा करने के लिए काफी नहीं थीं।

अब, किसानों के पास प्याज नहीं है क्योंकि उन्होंने अपना स्टॉक बेच दिया है और खुदरा कीमतें 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं।

चौहान ने राजधानी में एक उद्योग कार्यक्रम में कहा, ‘‘क्या किसानों को उनकी मेहनत का पूरा दाम मिलता है? क्या बिचौलियों को इतना मुनाफा कमाने का हक है? सरकार इस पर कार्रवाई कर रही है।’’

मंत्री ने उद्योग से एक ऐसी व्यवस्था बनाने में मदद मांगी जिससे यह पक्का हो सके कि किसानों को मुनाफा मिले और ग्राहकों को भी ज्यादा कीमत न चुकानी पड़े।

चौहान ने कहा, ‘‘हमें कुछ करने की जरूरत है।’’ उन्होंने बताया कि ऐसी व्यवस्था बनाने के लिए एक टीम भी बनाई गई है।

मंत्री ने कृषि मूल्य श्रृंखला में किसानों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।

टिकाऊ विकास के लिए सीआईआई-आईटीसी उत्कृष्टता केंद्र में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चौहान ने खाद्य सुरक्षा को पक्का करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे टकराव और रूस-यूक्रेन युद्ध को देखते हुए भारत किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रह सकता।

मंत्री ने रसायन और उर्वरक के संतुलित इस्तेमाल, पानी के सही इस्तेमाल, एकीकृत खेती और प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने, और जलवायु-स्मार्ट कृषि को अपनाने के जरिये मिट्टी की सेहत सुधारने की जरूरत के बारे में बात की।

चौहान ने आधुनिक प्रौद्योगिकी और शोध के काम को किसानों के खेतों तक ले जाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों को सलाह दी गई है कि वे किसानों के खेतों में जाकर समस्याओं का पता लगाएं और फिर शोध कार्यक्रम शुरू करें।

मंत्री ने उद्योग से कृषि क्षेत्र में बुनियादी ढांचा बनाने में निवेश करने को कहा।

उन्होंने सुझाव दिया कि कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कोष का इस्तेमाल क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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