चंडीगढ़, 11 अप्रैल (भाषा) हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने शनिवार को चिंता जताते हुए कहा कि राज्य में न्यूनतम वेतन में हालिया वृद्धि के कारण लाखों कर्मचारी विभिन्न सरकारी कल्याण योजनाओं के दायरे से बाहर हो सकते हैं।
चौटाला ने कहा कि कई योजनाओं में पात्रता के लिए परिवार की वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम होना जरूरी है। लेकिन अब न्यूनतम वेतन सभी श्रेणियों में 15,000 रुपये प्रति माह से अधिक हो गया है, जिससे पंजीकृत कर्मचारियों की वार्षिक आय इस सीमा से ऊपर चली गई है और वे लाभ पाने के पात्र नहीं रहेंगे।
उन्होंने कहा कि बीपीएल राशन कार्ड, चिरायु हरियाणा के तहत मुफ्त इलाज, दयालु योजना के तहत आर्थिक सहायता, महिलाओं के लिए लाडो लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना, निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा के लिए चिराग योजना और विवाह सहायता योजनाएं जैसी कई योजनाओं में पात्रता परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में दर्ज आय पर आधारित है।
उन्होंने पूर्व के उदाहरण का जिक्र करते हुए कहा कि परिवार पहचान पत्र के आधार पर पेंशन बंद होने जैसी स्थिति पहले भी सामने आ चुकी है और अब कर्मचारियों के साथ भी ऐसा हो सकता है।
चौटाला ने राज्य सरकार से मांग की कि इन योजनाओं के लिए वार्षिक आय सीमा बढ़ाकर 2.40 लाख रुपये की जाए और विभिन्न पोर्टल पर पात्रता मानकों को अपडेट किया जाए, ताकि कर्मचारी वर्ग को परेशानी न हो।
उन्होंने निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों की मांगों को भी पूरा करने का आग्रह किया।
भाषा योगेश पाण्डेय
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