बीओटी वाली राजमार्ग परियोजनाओं के मॉडल रियायत समझौते में हुआ संशोधन
बीओटी वाली राजमार्ग परियोजनाओं के मॉडल रियायत समझौते में हुआ संशोधन
नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘बनाओ-चलाओ-सौंप दो’ (बीओटी) मॉडल के तहत संचालित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए मॉडल रियायत समझौते (एमसीए) को संशोधित किया है।
संशोधित समझौते में परियोजना की पुनर्खरीद (बायबैक) का विकल्प, संचालक कंपनी को राजस्व सहायता और कंपनी एवं सरकार के बीच यातायात जोखिम साझा करने का प्रावधान किया गया है।
इस बदलाव का मकसद बीओटी परियोजनाओं को बैंकों के लिए अधिक वित्तपोषण योग्य, जोखिम कम और निजी क्षेत्र के लिए आकर्षक बनाना है।
मंत्रालय ने एक ज्ञापन में कहा कि संशोधित एमसीए विभिन्न हितधारकों के सामने आ रही बीओटी परियोजनाओं से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए गठित अंतर-मंत्रालयी समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है।
संशोधित समझौते में यातायात जोखिम साझा करने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत शुरुआती सहायता अवधि के बाद भी यातायात अपेक्षा से कम रहने पर रियायत की अवधि बढ़ाई जा सकती है, जबकि यातायात में उल्लेखनीय वृद्धि होने पर रियायत अवधि घटाई जा सकती है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 में कुल 1.8 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली और 2,442 किलोमीटर लंबी 54 परियोजनाओं को आवंटित करने की योजना पिछले महीने सार्वजनिक की थी।
मंत्रालय ने इस साल मई में बड़े कोषों और बड़े निवेशकों को भी बीओटी परियोजनाओं के लिए बोली लगाने की अनुमति दी थी। कुछ परियोजनाओं में अनुबंध शर्तों से जुड़ी चिंताओं के कारण निजी निवेश नहीं आने पर यह कदम उठाया गया था। इससे पहले बड़े कोषों को केवल टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (टीओटी) परियोजनाओं के लिए बोली लगाने की अनुमति थी।
भाषा प्रेम प्रेम योगेश
योगेश

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