एनसीडीआरसी ने एयरबैग न खुलने संबंधी जगुआर लैंड रोवर के खिलाफ दायर शिकायत खारिज की

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एनसीडीआरसी ने एयरबैग न खुलने संबंधी जगुआर लैंड रोवर के खिलाफ दायर शिकायत खारिज की

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  • Publish Date - April 9, 2026 / 05:28 PM IST,
    Updated On - April 9, 2026 / 05:28 PM IST

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने जगुआर लैंड रोवर के एक वाहन में विनिर्माण संबंधी कमी के आरोपों वाली शिकायत को खारिज कर दिया है। आयोग ने पाया कि दुर्घटना के दौरान चालक की ओर का एयरबैग न खुलने के पीछे किसी आंतरिक खराबी का कोई सबूत नहीं है।

एनसीडीआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए. पी. साही और सदस्य भरतकुमार पंड्या की पीठ हरविंदर सिंह भुल्लर द्वारा जगुआर लैंड रोवर, टाटा मोटर्स लिमिटेड और डीलर एएमपी मोटर्स के खिलाफ दायर शिकायत पर सुनवाई कर रही थी। यह मामला 2010 के ‘रेंज रोवर ऑटोबायोग्राफी’ मॉडल से जुड़ा है।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि दिसंबर 2013 में हुए एक हादसे के दौरान चालक की तरफ का एयरबैग नहीं खुला जबकि साथ की सीट खाली होने के बावजूद उसका एयरबैग खुल गया। हादसे में चालक को गंभीर चोटें आई थीं।

भुल्लर ने वाहन को बदलने या नयी कार देने और सेवा में कमी के लिए पांच करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की थी।

पीठ ने वाहन विनिर्माता द्वारा प्रस्तुत तकनीकी रिपोर्ट का विश्लेषण किया।

रिपोर्ट के अनुसार, साथ ही सीट का एयरबैग इसलिए खुला क्योंकि सीट बेल्ट न लगी होने के कारण वह जल्दी सक्रिय होने वाली श्रेणी में था। वहीं, चालक की तरफ का एयरबैग इसलिए नहीं खुला क्योंकि चालक ने सीट बेल्ट लगा रखी थी और टक्कर की तीव्रता उस स्तर तक नहीं पहुंची थी जिसपर एयरबैग का खुलना अनिवार्य होता है।

आयोग ने कहा, ‘‘ साथ वाली सीट का एयरबैग खुलना दर्शाता है कि कोई विनिर्माण दोष नहीं था। ’’

पीठ ने स्पष्ट किया कि कोई भी वाहन ‘अनंत काल’ की वारंटी के साथ नहीं आता। दुर्घटना के समय वाहन की तीन साल की वारंटी अवधि समाप्त हो चुकी थी।

इसके अलावा, जगुआर लैंड रोवर की ओर से पेश वकीलों ने तर्क दिया कि कार की मरम्मत के बाद इसे 50,000 किलोमीटर से अधिक चलाया जा चुका है और कोई समस्या नहीं आई। आयोग ने इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए माना कि शिकायतकर्ता को कोई राहत नहीं दी जा सकती।

भाषा सुमित निहारिका

निहारिका

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