नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) उद्योग मंडल फिक्की ने बृहस्पतिवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में दबाव के शुरुआती संकेत दिखने लगे हैं।
रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि इन जोखिमों को कम करने के लिए तत्काल सक्रिय कदम उठाने और भविष्य के लिए तैयारी करने की आवश्यकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट से निपटने के लिए सरकार को सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को आपातकालीन वित्तीय सहायता प्रदान करने पर विचार करना चाहिए। साथ ही, सार्वजनिक खरीद अनुबंधों में ‘फोर्स मेज्योर’ (अपरिहार्य परिस्थितियों) से जुड़े नियमों में ढील देनी चाहिए, ताकि कंपनियों पर देरी के कारण जुर्माना न लगे।
फिक्की ने यह भी सुझाव दिया है कि सरकार को पेट्रोलियम उत्पादों को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने के लिए जीएसटी परिषद के भीतर चर्चा शुरू करनी चाहिए। इसमें तर्क दिया गया है कि इस कदम से लागत का बोझ कम होगा, आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता में सुधार होगा और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रिपोर्ट में तेल और गैस के स्रोतों में विविधता लाने, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की क्षमता बढ़ाने और हरित हाइड्रोजन जैसी स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
उद्योग जगत को सलाह दी गई है कि वे अपनी परिचालन निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए ‘वॉर रूम’ (संकट प्रबंधन केंद्र) स्थापित करें और कच्चे माल के लिए किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अपने आपूर्ति तंत्र का विस्तार करें।
इसके अलावा, कंपनियों को मुद्रा के उतार-चढ़ाव से होने वाले नुकसान से बचने के लिए भी सुरक्षात्मक उपाय करने का सुझाव दिया गया है।
भाषा सुमित अजय
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