कोच्चि, 13 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बाद उत्पन्न एलपीजी की कमी के कारण केरल में करीब 40 प्रतिशत रेस्तरां बंद होने की स्थिति में हैं, क्योंकि कई प्रतिष्ठान खाना पकाने के वैकल्पिक तरीकों का तुरंत इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। यह जानकारी उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने दी।
एलपीजी की कमी से रेस्तरां के अलावा कैटरिंग सेवाएं, छात्रावास, कैंटीन और शवदाह गृह भी प्रभावित हुए हैं।
‘केरल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन’ के अध्यक्ष जी. जयपाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि शुक्रवार तक राज्य में लगभग 40 प्रतिशत रेस्तरां बंद हो जाएंगे।
उन्होंने बताया, ‘‘ बृहस्पतिवार तक करीब 20 प्रतिशत रेस्तरां बंद हो चुके थे। शुक्रवार तक यह संख्या बढ़कर 40 प्रतिशत हो जाएगी क्योंकि एलपीजी का भंडार जल्द खत्म हो जाएगा।’’
केंद्र और राज्य सरकारों ने खाना पकाने के वैकल्पिक तरीके अपनाने की सलाह दी है लेकिन संगठन का कहना है कि शहरी क्षेत्रों के होटलों में लकड़ी से खाना बनाना व्यावहारिक नहीं है।
जयपाल ने कहा कि खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत अधिकतर शहरी रेस्तरां में आधुनिक रसोई प्रणाली अपनाई गई है। वहां लकड़ी या अन्य ईंधनों से खाना बनाने की व्यवस्था नहीं है। शहरी क्षेत्रों के रेस्तरां इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ निजी एलपीजी आपूर्तिकर्ता सिलेंडर के लिए लगभग दोगुनी कीमत वसूल रहे हैं और पिछले दो दिन में ईंधन लकड़ी की कीमत भी काफी बढ़ गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘ कासरगोड में हमारे एक सदस्य को 17 किलोग्राम का निजी एलपीजी सिलेंडर 3,000 रुपये में मिला जबकि सामान्य तौर पर 19 किलोग्राम सिलेंडर की कीमत करीब 1,800 रुपये होती है। लकड़ी के दाम भी बहुत बढ़ गए हैं और वैकल्पिक व्यवस्था अपनाना आसान नहीं है।’’
जयपाल ने कहा कि अगर पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के तुरंत बाद सरकार लोगों को संभावित कमी के बारे में आगाह कर देती, तो स्थिति बेहतर ढंग से संभाली जा सकती थी।
उन्होंने कहा, ‘‘ अगर पहले जानकारी मिल जाती तो कई रेस्तरां मालिक वैकल्पिक व्यवस्था कर लेते। इस सप्ताह की शुरुआत तक सब सामान्य था और अचानक संकट खड़ा हो गया।’’
उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, यह संकट कैटरिंग सेवाओं को भी प्रभावित कर रहा है जबकि राज्य में शादी का मौसम शुरू होने वाला है।
ऑल केरल कैटरर्स एसोसिएशन के तिरुवनंतपुरम जिले के अध्यक्ष वी सुनुकुमार ने बताया कि 15 मार्च से मलयालम महीने ‘मेदम’ के साथ शादियां शुरू हो जाएंगी और इस कारण पहले से बुकिंग हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा मुस्लिम समुदाय में रमजान के बाद अगले सप्ताह से निकाह समारोह शुरू होंगे और ईसाई समुदाय का ‘लेंट’ काल या चालीसा काल अगले महीने की शुरुआत में समाप्त होगा जिसके बाद राज्य भर में अधिक शादियां होंगी।
उन्होंने कहा, “कम से कम सरकार हमें अस्थायी रूप से घरेलू गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने की अनुमति दे सकती है। फिलहाल हमें एक भी वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर नहीं मिल रहा है।”
एलपीजी की कमी से मेस सुविधा वाले छात्रावास भी प्रभावित हुए हैं।
कोच्चि के कलूर क्षेत्र में छात्रावास चलाने वाली सुजा ने बताया कि उन्होंने रसोई के लिए लकड़ी का इस्तेमाल शुरू कर दिया है लेकिन शहर में लकड़ी की भी कमी है।
इस बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा ने एलपीजी संकट को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया है।
तिरुवनंतपुरम में शुक्रवार को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया गया।
केरल सरकार ने केंद्र से बृहस्पतिवार को आग्रह किया था कि राज्य को आवंटित गैर-घरेलू एलपीजी सिलेंडर का कोटा बढ़ाया जाए, क्योंकि कमी के कारण कई क्षेत्रों में दिक्कतें आ रही हैं।
वर्तमान में राज्य को गैर-घरेलू एलपीजी सिलेंडर का कोटा 20 प्रतिशत तक सीमित है। केरल में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों की मौजूदगी को देखते हुए राज्य सरकार केंद्र से इसे बढ़ाने का अनुरोध करेगी।
यह निर्णय मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया जिसमें गैर-घरेलू उपयोग वाले रसोई गैस सिलेंडरों की कमी से निपटने पर चर्चा हुई।
बैठक में वितरण के लिए प्राथमिकता श्रेणियां तय करने और जमाखोरी व कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी दल बनाने का भी निर्णय लिया गया।
एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में अस्पताल, वृद्धाश्रम, अनाथालय, स्कूल, सामुदायिक रसोई और सूचना प्रौद्योगिकी पार्कों व कारखानों की कैंटीन को प्राथमिकता दी जाएगी।
इसके अलावा नागरिक आपूर्ति विभाग वैकल्पिक ईंधन के रूप में मिट्टी के तेल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए भी कदम उठाएगा।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा