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वैश्विक चुनौतियों से निपटने को नए सिरे से रणनीति बनाने की जरूरत : वित्त मंत्रालय रिपोर्ट

वैश्विक चुनौतियों से निपटने को नए सिरे से रणनीति बनाने की जरूरत : वित्त मंत्रालय रिपोर्ट

वैश्विक चुनौतियों से निपटने को नए सिरे से रणनीति बनाने की जरूरत : वित्त मंत्रालय रिपोर्ट
Bhasha
Published: 29 Jul 2026 | 7:30 pmModified: 29 Jul 2026 | 7:30 pm

नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) भारत को ऊंची ऊर्जा कीमतों जैसी उभरती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी रणनीतियों को नए सिरे से तैयार करना होगा। देश को रणनीतिक बढ़त हासिल करने के साथ आर्थिक वृद्धि को बनाये रखने के लिए घरेलू सुधारों और तेज नीतिगत कदमों की जरूरत है। वित्त मंत्रालय की बुधवार को जारी मासिक रिपोर्ट में यह कहा गया है।

इसमें कहा गया है कि खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के कारण महंगाई, राजकोषीय घाटे और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ने का जोखिम है, जबकि आर्थिक वृद्धि पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ऐसे में विदेशी और घरेलू निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए तेज नीतिगत प्रतिक्रिया और उनका प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है।

जुलाई की मासिक आर्थिक समीक्षा में वित्त मंत्रालय ने कहा, ‘‘कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े वैश्विक बदलाव और आपूर्ति श्रृंखलाओं के रणनीतिक इस्तेमाल की बढ़ती प्रवृत्ति इस बात का संकेत है कि भारत को दीर्घकालिक मजबूती और रणनीतिक लाभ हासिल करने के लिए अभी और प्रयास करने होंगे। हाल के वर्ष चुनौतियों से निपटने के लिए खुद को तैयार करने और सावधानी बरतने के रहे हैं। आने वाले साल भी इससे अलग नहीं होंगे।’’

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ हाल में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा आई तेजी, यदि यह लंबे समय तक बनी रहती है तो इससे राजकोषीय घाटे और चालू खाते के संतुलन के वित्त पोषण पर दबाव बढ़ सकता है।’’

वित्त मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता फिर बढ़ी है और इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है।

हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में यह वृद्धि पश्चिम एशिया संघर्ष के शुरुआती चरण में आए तेज उछाल की तुलना में काफी कम है, लेकिन वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। अमेरिका और सऊदी अरब के ईरान में लक्षित हमले किए जाने के बाद ब्रेंट क्रूड वायदा कीमत में पांच प्रतिशत से अधिक की तेजी आई और यह 88.40 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गयी।

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे महंगाई की चिंताएं बढ़ी हैं। मई की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमत चार साल के उच्च स्तर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जबकि युद्ध से पहले यह करीब 73 डॉलर प्रति बैरल थी।

मंत्रालय ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। हालांकि, अनिश्चितताएं अभी बनी हुई हैं।

रिपोर्ट कहती है, ‘‘इसीलिए वैश्विक चुनौतियों से पार पाने और रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए भारत को खुद को नए सिरे से तैयार करना होगा...। जैसे-जैसे बाहरी परिस्थितियां बदल रही हैं, घरेलू सुधारों, सूझबूझ वाला वृहद आर्थिक प्रबंधन और तेज नीतिगत कदमों के निरंतर समन्वय के साथ उनका जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन, भारत की आर्थिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।’’

सरकार वैश्विक घटनाओं के कारण कच्चे तेल के दाम में उतार-चढ़ाव के साथ संभावित अल नीनो के कारण मौसम के प्रतिरूप पर लगातार नजर रख रही है। हालांकि, घरेलू महंगाई का परिदृश्य सतर्क लेकिन संरचनात्मक रूप से मजबूत बना हुआ है। कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए सक्रिय उपाय, कृषि जिंसों की मजबूत खरीद व्यवस्था और लक्षित आकस्मिक योजनाएं महंगाई नियंत्रण को समर्थन दे रही हैं।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि मजबूत घरेलू बुनियाद, निरंतर नीतिगत समर्थन और विकास के संरचनात्मक कारकों के कारण भारत का आर्थिक परिदृश्य मजबूत बना हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में किए गए संरचनात्मक सुधारों और बुनियादी ढांचे में निवेश ने आर्थिक मजबूती को बढ़ाया है, जिसका असर मार्च से जून, 2026 के आंकड़ों में भी दिखाई देता है।

इसके अलावा, भारत के बाहरी क्षेत्र ने भी मजबूती दिखाई है। बेहतर निर्यात प्रदर्शन, सेवा व्यापार में अधिशेष और लगातार बढ़ते धन प्रेषण ने चालू खाते को मजबूती दी है।

मंत्रालय ने कहा कि हाल के नीतिगत कदमों से निकट भविष्य में पूंजी प्रवाह को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के साथ ये कारक देश के बाहरी क्षेत्र की मजबूती को और बढ़ाएंगे।

भाषा रमण अजय

अजय

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