नई खनिज संपदा की खोज में तेजी लाने के लिए कदम उठाने की जरूरत: नीति आयोग
नई खनिज संपदा की खोज में तेजी लाने के लिए कदम उठाने की जरूरत: नीति आयोग
नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) नीति आयोग ने बुधवार को कहा कि सरकार को खनिज संसाधनों की नई खोज में तेजी लाने के लिए भू-वैज्ञानिक आंकड़ों तक पहुंच आसान बनाने, खोज से जुड़ी छोटी कंपनियों के लिए जोखिम पूंजी और वित्तीय सहायता तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के उपाय करने चाहिए।
नीति आयोग ने व्यापार पर अपनी तिमाही रिपोर्ट (ट्रेड वॉच क्वार्टरली) में सुझाव दिया कि सरकार को अनुपालन रिपोर्ट की वैधता अवधि बढ़ानी चाहिए, बार-बार होने वाली मंजूरी की प्रक्रियाओं को कम करना चाहिए, वन और वन भूमि के उपयोग के बाद बदले में दूसरी जगह वन लगाने से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाना चाहिए तथा पहले से मौजूद परियोजनाओं के विस्तार के लिए स्पष्ट नियम बनाने चाहिए। इससे परियोजनाओं में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिलेगी।
आयोग ने पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार से जुड़ी परियोजनाओं के लिए भी स्पष्ट नियम बनाने का सुझाव दिया है।
रिपोर्ट में नवीकरणीय ऊर्जा की खुली पहुंच से जुड़े नियमों में एकरूपता लाने, औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बैंकिंग सीमा बढ़ाने और बिजली पारेषण शुल्क को तर्कसंगत बनाने की सिफारिश की गई है। साथ ही, खनिजों के गारे के परिवहन के लिए पाइपलाइन परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी देने और परियोजना स्थल से बाहर की लॉजिस्टिक सुविधाओं पर माल एवं सेवा कर के प्रावधान से जुड़े मसलों को दूर करने की बात कही गई है।
नीति आयोग ने विमानन क्षेत्र के लिए जरूरी उच्च गुणवत्ता वाले मिश्र धातु इस्पात, विशेष मिश्र धातु, एल्युमीनियम और टाइटेनियम मिश्र धातुओं का घरेलू उत्पादन बढ़ाने की जरूरत बताई। इसके साथ चरणबद्ध तरीके से घरेलू सामग्री के उपयोग की अनिवार्यता लागू करने और विमान उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला में भारतीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने का सुझाव दिया गया है।
नीति आयोग ने यूरोपीय संघ की कार्बन सीमा समायोजन व्यवस्था के तहत सत्यापन की क्षमता बढ़ाने और निर्यातकों को यूरोपीय संघ की कार्बन संबंधी रिपोर्टिंग जरूरतों को पूरा करने में मदद देने की भी सिफारिश की है।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर धातु की मांग 1.63 लाख करोड़ डॉलर रही। इसमें भारत का निर्यात 34.8 अरब डॉलर रहा, जो वैश्विक मांग का 2.1 प्रतिशत है। लौह एवं इस्पात (उनसे बनी वस्तुओं समेत) वैश्विक धातु मांग का 50.9 प्रतिशत यानी 826.8 अरब डॉलर रही। भारत इस मांग का केवल 2.5 प्रतिशत हिस्सा पूरा करता है।
भारत प्राथमिक एल्युमीनियम और इस्पात उत्पादन में दुनिया में दूसरे, लौह अयस्क, क्रोमाइट और जस्ता उत्पादन में तीसरे तथा मैंगनीज अयस्क उत्पादन में पांचवें स्थान पर है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत प्रमुख थोक खनिजों के मामले में काफी हद तक आत्मनिर्भर है। लौह अयस्क में आत्मनिर्भरता 100 प्रतिशत, जस्ता में 94 प्रतिशत, क्रोमाइट में 92 प्रतिशत और बॉक्साइट में 90 प्रतिशत है। वहीं मैंगनीज अयस्क में यह 37 प्रतिशत, तांबे में 35 प्रतिशत और मैग्नेसाइट में 17 प्रतिशत है।
भाषा रमण अजय
अजय

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