मुंबई, 30 मार्च (भाषा) भारत पर प्रवासियों के शुद्ध दावे दिसंबर, 2025 के अंत तक 260.5 अरब डॉलर रहे, जो पिछली तिमाही की तुलना में 10.9 अरब डॉलर कम है। इस कमी का कारण भारत में विदेशी स्वामित्व वाली संपत्तियों में वृद्धि की तुलना में भारतीय निवासियों की विदेशी वित्तीय संपत्तियों में अपेक्षाकृत अधिक वृद्धि है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों और अंतरराष्ट्रीय देनदारियों का अनुपात बढ़कर दिसंबर, 2025 के अंत तक 82.1 प्रतिशत हो गया है। यह पिछली तिमाही में 81.4 प्रतिशत और एक वर्ष पहले की समान अवधि में 74.6 प्रतिशत था।
भारतीय रिजर्व बैंक ने दिसंबर, 2025 के अंत तक भारत की अंतरराष्ट्रीय निवेश स्थिति से जुड़े आंकड़े जारी किए हैं।
आरबीआई ने कहा, ‘‘सितंबर, 2025 के अंत से दिसंबर, 2025 के अंत तक भारत में प्रवासियों के शुद्ध दावों में 10.9 अरब डॉलर की गिरावट आई है और यह घटकर 260.5 अरब अमेरिकी डॉलर पर रहा। यह गिरावट मुख्य रूप से भारतीय निवासियों की विदेशी वित्तीय परिसंपत्तियों (12.8 अरब डॉलर) में हुई वृद्धि के कारण है, जबकि भारत में विदेशी स्वामित्व वाली परिसंपत्तियों (1.9 अरब डॉलर) में वृद्धि कम है।’’
केंद्रीय बैंक के अनुसार, आलोच्य तिमाही के दौरान भारतीय निवासियों की विदेशी वित्तीय परिसंपत्तियों में वृद्धि हुई है। इसका मुख्य कारण उनका विदेशों में प्रत्यक्ष निवेश (7.6 अरब डॉलर) और मुद्रा एवं जमा (9.4 अरब डॉलर) में वृद्धि है।
आरबीआई ने देनदारियों के संबंध में कहा कि देश में आया प्रत्यक्ष निवेश (3.2 अरब डॉलर) और पोर्टफोलियो निवेश (2.8 अरब डॉलर) में गिरावट की भरपाई अन्य निवेश के तहत व्यापार ऋण (11.4 अरब डॉलर) में वृद्धि से हुई। इसके परिणामस्वरूप दिसंबर, 2025 के अंत तक भारत में विदेशी स्वामित्व वाली परिसंपत्तियों में तिमाही आधार पर मामूली वृद्धि (0.1 प्रतिशत) हुई।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि इक्विटी निवेश में गिरावट और बॉन्ड निवेश में वृद्धि के साथ, कुल बाहरी देनदारियों में बॉन्ड देनदारियों की हिस्सेदारी बढ़कर दिसंबर, 2025 के अंत तक 55.3 प्रतिशत हो गई, जो इससे पिछली तिमाही में 54.8 प्रतिशत थी।
भाषा रमण अजय
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