कोलकाता, 21 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल के विधायक हुमायूं कबीर ने बृहस्पतिवार को कहा कि ईद उल अजहा के दौरान कुर्बानी “हर हाल में होगी”। इससे पशु वध को नियंत्रित करने संबंधी भाजपा सरकार के हालिया दिशानिर्देशों पर राजनीतिक टकराव बढ़ गया।
कबीर ने धार्मिक प्रथाओं पर किसी भी प्रकार की पाबंदी के खिलाफ चेतावनी दी। आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के संस्थापक कबीर ने कहा कि मुसलमान ‘कुर्बानी’ के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेंगे और उन्होंने सरकार पर धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “हम कानून का सम्मान करते हैं। लेकिन कुर्बानी होगी। कुरान में जो लिखा है, वही होगा। मैं सीधे शुभेंदु अधिकारी से कहना चाहता हूं कि आग से खेलने की कोशिश न करें। यह आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। मुस्लिम समुदाय कुर्बानी पर कोई समझौता नहीं करेगा।”
सड़कों पर नमाज पढ़ने पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर नाराजगी जताते हुए कबीर ने कहा कि सरकार को ईद की नमाज के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराना चाहिए।
उन्होंने कहा, “ईद की नमाज रेड रोड पर होती है। अगर भविष्य में इसकी अनुमति नहीं दी गई, तो विरोध प्रदर्शन होंगे। नमाज अदा करने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यदि व्यवस्था नहीं की जाती, तो सड़कों पर पूजा की अनुमति भी नहीं दी जानी चाहिए।”
हालांकि, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कबीर की टिप्पणियों को खारिज करते हुए कहा कि यह मुद्दा कानून लागू करने और अवैध गतिविधियों को रोकने का है।
भट्टाचार्य ने कहा, “अवैध बूचड़खानों को चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा लोगों की व्यक्तिगत खान-पान की पसंद में हस्तक्षेप नहीं करती, लेकिन गायों के खुले या सार्वजनिक वध का कड़ा विरोध करती है।
यह बयानबाजी ऐसे समय हुई है जब राज्य में पशु वध से जुड़े हालिया नियामक उपायों को लेकर बहस तेज हो गई है। यह मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है और राजनीतिक तथा सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
पश्चिम बंगाल सरकार ने 13 मई को दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा था कि अधिकारियों से “स्वास्थ्य प्रमाणपत्र” प्राप्त किए बिना पशु वध की अनुमति नहीं होगी और उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। इसमें यह भी कहा गया था कि खुले सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध “सख्ती से प्रतिबंधित” रहेगा।
इस कदम के बाद राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों और अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ वर्गों ने धार्मिक प्रथाओं पर संभावित प्रतिबंध को लेकर चिंता जताई है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि ये उपाय पशु वध को नियंत्रित करने और कानूनी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किए गए हैं।
भाषा रंजन अविनाश
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