(तस्वीरों के साथ)
कोलकाता, 21 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा विधानसभा सीट पर बृहस्पतिवार को पुनर्मतदान शांतिपूर्ण तरीके से हुआ जहां 86 फीसदी से अधिक लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया ।
यह पुनर्मतदान टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के दो दिन पहले नाटकीय रूप से चुनाव से हटने के कारण उत्पन्न स्थिति बीच कराया गया, जिसे व्यापक रूप से सत्तारूढ़ भाजपा को राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस निर्वाचन क्षेत्र में लगभग एकतरफा जीत दिलाने के रूप में देखा जा रहा है।
केंद्रीय बलों की भारी तैनाती और दिनभर मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारों के बावजूद, पुनर्मतदान बिना किसी बड़ी घटना के संपन्न हो गया।
यह पुनर्मतदान 29 अप्रैल के चुनाव से जुड़े विवाद के कारण हुआ, जब कई मतदान केंद्रों से शिकायतें सामने आईं कि ईवीएम पर इत्र जैसे पदार्थ और चिपकने वाली टेप लगाई गई थीं।
निर्वाचन आयोग ने फाल्टा में पुनर्मतदान का आदेश दिया, जबकि शेष 293 विधानसभा क्षेत्रों के परिणाम चार मई को पहले ही घोषित किए जा चुके हैं, जिसमें भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए पश्चिम बंगाल में पहली बार सत्ता हासिल की है।
चुनाव अधिकारियों ने बताया कि शाम पांच बजे तक 2.36 लाख मतदाताओं में से 86.11 प्रतिशत ने मतदान किया । इससे पहले 29 अप्रैल को हुए मतदान में इसी समय तक 86.71 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था।
अंतिम आंकड़ा आना अभी बाकी है ।
भारी मतदान पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने फाल्टा के लोगों को धन्यवाद दिया और कहा कि निर्वाचन क्षेत्र के दृश्य किसी उत्सव जैसे लग रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘दृश्यों से ऐसा प्रतीत होता है जैसे लोग किसी उत्सव में भाग ले रहे हों। पुनर्मतदान में इतना मतदान होना वास्तव में अभूतपूर्व है।’’
जहांगीर खान के चुनाव से हटने से फाल्टा के राजनीतिक समीकरण में काफी बदलाव आ गया है। भाजपा, जो पहले से ही एकतरफा जीत का भरोसा जता रही है, टीएमसी उम्मीदवार के पुनर्मतदान से पहले ही चुनाव मैदान से हटने के बाद इस सीट पर अपनी जीत पक्की मान रही है।
यदि भाजपा फाल्टा सीट जीतती है, तो 2026 के विधानसभा चुनावों में उसकी सीटों की संख्या बढ़कर 208 हो जाएगी, हालांकि अधिकारी द्वारा भवानीपुर सीट बरकरार रखते हुए नंदीग्राम सीट खाली करने के फैसले के बाद विधानसभा की कुल संख्या 207 ही रहेगी।
इस निर्वाचन क्षेत्र में कुल मतदाताओं में 1,21,300 पुरुष, 1,15,135 महिलाएं और नौ तृतीय-लिंगी व्यक्ति शामिल हैं। मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ और शाम छह बजे तक चला।
केंद्रीय बलों की लगभग 35 कंपनियां 285 मतदान केंद्रों पर तैनात हैं। इसके अतिरिक्त, किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने के लिए 30 त्वरित प्रतिक्रिया दलों को तैयार रखा गया है।
एक निर्वाचन अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘मतदान शांतिपूर्ण रहा है। फाल्टा में कहीं से भी कोई अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की लंबी कतार देखी गई। शाम पांच बजे तक 86.11 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।’’
विधानसभा क्षेत्र के 285 मतदान केंद्रों के बाहर सुबह से ही बड़ी संख्या में मतदाता कतार में खड़े नजर आए।
तृणमूल कांग्रेस के जहांगीर खान सहित कुल छह उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। हालांकि, खान ने मंगलवार को चुनाव से पीछे हटने की घोषणा की थी। तृणमूल कांग्रेस ने इसे जहांगीर का निजी फैसला करार दिया है।
खान के पीछे हटने की घोषणा के बावजूद उनका नाम ईवीएम में दर्ज है, क्योंकि वह आधिकारिक तौर पर अपनी उम्मीदवारी वापस नहीं ले सके। अन्य उम्मीदवारों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के देबांग्शु पांडा, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के शंभूनाथ कुर्मी और कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला शामिल हैं।
फाल्टा में 29 अप्रैल को मतदान के बाद से ही राजनीतिक तनाव की स्थिति बनी हुई है। उस समय कई मतदान केंद्रों से शिकायतें सामने आईं कि ईवीएम पर सुगंधित पदार्थ और टेप लगाई गई थीं, जिसके परिणामस्वरूप चुनाव रद्द करना पड़ा।
राजनीतिक रूप से मंगलवार को उस समय चुनावी परिदृश्य बदल गया जब टीएमसी के उम्मीदवार जहांगीर खान – जो फाल्टा में चुनाव प्रचार के दौरान सबसे विवादास्पद और चर्चित चेहरों में से एक थे – ने दोबारा हो रहे चुनाव में नहीं लड़ने की घोषणा कर दी।
खान ने फाल्टा में राजनीतिक बगावत की स्वघोषित ‘पुष्पा’ छवि बनाई थी और लंबे समय से खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश करते रहे जो झुकने को तैयार नहीं था।
इसलिए, पुनर्मतदान से पहले चुनाव से हटने के उनके फैसले ने पहले से ही विवादों से घिरे इस निर्वाचन क्षेत्र में राजनीतिक विडंबना की एक और परत जोड़ दी।
खान ने बाद में कहा कि उन्होंने फाल्टा के हित में चुनाव से हटने का फैसला किया है और अपने इस निर्णय के पीछे मुख्यमंत्री अधिकारी द्वारा विशेष विकास पैकेज देने के वादे को एक कारण बताया।
हालांकि, टीएमसी ने तुरंत खान के इस कदम से खुद को अलग कर लिया और इसे उनका ‘निजी निर्णय’ बताते हुए निर्वाचन क्षेत्र में डराने-धमकाने और दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया।
इससे पहले, अधिकारी ने खान का ‘मैदान छोड़ने’ के लिए मजाक उड़ाया था। अधिकारी ने दावा किया था कि खान को एहसास हो गया है कि उन्हें जमीनी स्तर पर मतदान एजेंट नहीं मिलेंगे, जबकि भाजपा उम्मीदवार ने बृहस्पतिवार को जोर देकर कहा कि फाल्टा के लोगों को ‘आजादी मिल गई है’।
भाषा संतोष रंजन
रंजन