‘प्रतिचक्रीय पूंजी बफर’ व्यवस्था को फिलहाल लागू करने की जरूरत नहींः आरबीआई

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'प्रतिचक्रीय पूंजी बफर' व्यवस्था को फिलहाल लागू करने की जरूरत नहींः आरबीआई

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  • Publish Date - May 18, 2026 / 06:49 PM IST,
    Updated On - May 18, 2026 / 06:49 PM IST

मुंबई, 18 मई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ‘प्रतिचक्रीय पूंजी बफर’ (सीसीवाईबी) को सक्रिय करने की आवश्यकता नहीं है।

केंद्रीय बैंक ने बयान में कहा कि प्रमुख आर्थिक संकेतकों की समीक्षा और आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर फिलहाल यह कदम जरूरी नहीं माना गया है।

प्रतिचक्रीय पूंजी बफर एक ऐसा अतिरिक्त पूंजी प्रावधान है, जिसे बैंकों को अच्छे आर्थिक दौर में अलग रखना होता है। इसका उद्देश्य है कि भविष्य में आर्थिक स्थिति कमजोर होने की स्थिति में बैंक इस पूंजी के सहारे कर्ज देना जारी रख सकें और अर्थव्यवस्था में नकदी की कमी न आए।

आरबीआई के ‘वाणिज्यिक बैंकों के लिए पूंजी पर्याप्तता मानदंड, 2025’ के तहत निर्धारित ढांचे के अनुसार, सीसीवाईबी को जरूरत पड़ने पर लागू किया जाएगा और आमतौर पर इसके फैसले की पहले से घोषणा की जाती है।

इस व्यवस्था में ‘ऋण एवं जीडीपी अंतराल’ को प्रमुख संकेतक के रूप में देखा जाता है यानी अर्थव्यवस्था के आकार के मुकाबले कर्ज कितनी तेजी से बढ़ रहा है। कर्ज के असामान्य रूप से बढ़ने को संभावित जोखिम का संकेत माना जाता है।

आरबीआई ने कहा, ‘‘सीसीवाईबी संकेतकों के विश्लेषण के आधार पर फिलहाल ‘प्रतिचक्रीय पूंजी बफर’ लागू नहीं करने का फैसला किया गया है।”

केंद्रीय बैंक के अनुसार, इस व्यवस्था का मकसद एक तरफ बैंकों को अच्छे समय में मजबूत बनाना है, वहीं जरूरत से ज्यादा कर्ज वितरण पर लगाम लगाना भी है।

यह ढांचा 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद बैंकिंग प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया था।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय