चालू खाते का घाटा 2026-27 में बढ़कर जीडीपी के 2.3 प्रतिशत तक पहुंच सकता है: रिपोर्ट

Ads

चालू खाते का घाटा 2026-27 में बढ़कर जीडीपी के 2.3 प्रतिशत तक पहुंच सकता है: रिपोर्ट

  •  
  • Publish Date - May 18, 2026 / 06:03 PM IST,
    Updated On - May 18, 2026 / 06:03 PM IST

मुंबई, 18 मई (भाषा) भारत का चालू खाते का घाटा (कैड) वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 2.3 प्रतिशत तक पहुंच सकता है जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में इसके 0.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। विदेशी ब्रोकरेज कंपनी एचएसबीसी की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

रिपोर्ट में कहा गया कि भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स) का घाटा भी चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 65 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है जो गत वित्त वर्ष में 35 अरब डॉलर था।

एचएसबीसी ने कच्चे तेल की कीमतों को औसतन 95 डॉलर प्रति बैरल मानकर और तेल, सोना, प्रमुख वस्तुओं, सेवा व्यापार एवं धन प्रेषण (रेमिटेंस) से जुड़े प्रभावों को शामिल करते हुए यह अनुमान लगाया है कि कैड वित्त वर्ष 2026-27 में 2.3 प्रतिशत और 2025-26 में 0.9 प्रतिशत रहेगा।

रिपोर्ट में कहा गया कि भुगतान संतुलन का पूर्वानुमान विदेशी पोर्टफोलियो निवेश प्रवाह, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के रुझानों का अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है।

इसमें विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर कहा कि लगभग 700 अरब डॉलर का भंडार पारंपरिक दृष्टिकोण से पर्याप्त प्रतीत होता है लेकिन इसे वर्तमान समय के बढ़ते वैश्विक जोखिमों के संदर्भ में गतिशील दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है।

रिपोर्ट में कहा गया कि अतिरिक्त 30 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार (चाहे अतिरिक्त पूंजी प्रवाह से आए या चालू खाता बचत से) सभी सुरक्षा भंडार को 10 प्रतिशत स्तर से ऊपर बनाए रख सकता है।

इसमें कहा गया कि चालू खाते के घाटे को कम करना और टिकाऊ पूंजी प्रवाह आकर्षित करना दोहरी चुनौती बनी हुई है।

इस संदर्भ में नीतिगत उपायों की सिफारिश करते हुए रिपोर्ट में ईंधन की खुदरा कीमतों में वृद्धि का सुझाव भी दिया गया।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ 2022 के अनुभव से स्पष्ट है कि पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त कीमत वृद्धि अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकता का लगभग दो-तिहाई हिस्सा पूरा कर सकती है।’’

इसके अलावा रिपोर्ट में कहा कि हाल ही में हस्ताक्षरित व्यापार समझौतों को प्रभावी रूप से लागू करने से भारत की वृद्धि संभावनाएं बढ़ सकती हैं और धीमे पड़े एफडीआई प्रवाह को फिर से तेज किया जा सकता है।

भाषा निहारिका अजय

अजय