नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) चीनी की कीमतों में अचानक आए उछाल के बीच उद्योग संगठन इस्मा ने सोमवार को कहा कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने तथा कारोबारियों एवं थोक उपभोक्ताओं पर भंडारण सीमा लगाने से आने वाले दिनों में खुदरा कीमतें घटने की उम्मीद है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को चीनी की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जो एक महीने पहले के 48.73 रुपये से 29 प्रतिशत अधिक है। अधिकतम खुदरा कीमत 75 रुपये और मॉडल कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलोग्राम रही।
भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा विनिर्माता संघ (इस्मा) के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं। इनमें कारोबारियों एवं थोक उपभोक्ताओं की ओर से कीमत बढ़ने की उम्मीद में की गई खरीदारी और अनुमान से कम उत्पादन प्रमुख हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है। हमारा उत्पादन और भंडार बुनियादी रूप से संतोषजनक स्थिति में है।’’
उन्होंने कहा कि अक्टूबर, 2025-सितंबर, 2026 के मौजूदा चीनी सत्र में एथनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हुई चीनी को घटाने के बाद शुद्ध उत्पादन करीब 279 लाख टन रहने का अनुमान है। सत्र की शुरुआत में 50 लाख टन का भंडार था और घरेलू मांग 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है। सरकार द्वारा निर्यात पर रोक लगाने से पहले आठ लाख टन चीनी का निर्यात भी किया जा चुका था।
शिरगांवकर ने सितंबर के अंत में करीब 35 लाख टन चीनी का भंडार रहने का अनुमान जताया। उन्होंने कहा, ‘‘एथनॉल में इस्तेमाल की गई चीनी को ध्यान में रखने के बाद भी यह सामान्य घरेलू मांग के लिहाज से पर्याप्त सुरक्षित भंडार है।’’
उन्होंने कहा कि 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति, कारोबारियों एवं थोक उपभोक्ताओं के लिए भंडारण सीमा, कुछ राज्यों में विशेष पेराई तथा नए सत्र की जल्दी शुरुआत से घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों से बिक्री की कीमतें घटकर फिलहाल करीब 55-56 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई हैं।
शिरगांवकर ने कहा कि हालिया तेजी मौसम संबंधी प्रभाव, त्योहारी मांग, वैश्विक आपूर्ति में कमी और सबसे महत्वपूर्ण रूप से कीमत बढ़ने की उम्मीद में भंडारण के कारण आई है, न कि वास्तविक आपूर्ति की कमी से।
मिल स्तर की कीमतें बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा उद्योग को जिम्मेदार ठहराए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उद्योग कृत्रिम कमी पैदा करने और कीमतें बढ़ाने में शामिल नहीं रहा है। हालांकि, उन्होंने इस संभावना से इनकार नहीं किया कि कुछ मिलों ने भंडार रोककर रखा हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को देख रही है।
उन्होंने कहा कि सकल चीनी उत्पादन का शुरुआती अनुमान 345 लाख टन था, लेकिन मौसम संबंधी कारणों, गन्ने की कम पैदावार और गन्ने से चीनी निकलने की कम दर के कारण इसे घटाकर करीब 309 लाख टन कर दिया गया।
शिरगांवकर ने कीमतों में वृद्धि के लिए एथनॉल उत्पादन में चीनी के इस्तेमाल को जिम्मेदार मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि 2025-26 सत्र में अब तक करीब 29 लाख टन चीनी एथनॉल के लिए इस्तेमाल हुई है और पूरे सत्र में यह करीब 30 लाख टन रहने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि ब्राजील में चीनी उत्पादन के अनुमान में कमी से वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय कीमतें जून में करीब 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर अगस्त में करीब 552 डॉलर प्रति टन हो गई हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह दाम बढ़ने की उम्मीद में की गई खरीदारी रही है।
शिरगांवकर ने कहा, ‘‘कुछ कारोबारियों ने बाजार में आपूर्ति कम होने की भ्रामक धारणा पैदा की, जिसके बाद बड़े थोक खरीदारों ने भी डेढ़-दो महीने की जरूरत का चीनी भंडार पहले ही जमा करना शुरू कर दिया। इससे चीनी बाजार में उपलब्ध रहने के बजाय गोदामों में चली गई और कृत्रिम रूप से कमी जैसी स्थिति पैदा हो गई।’’
उन्होंने कारोबारियों के लिए मौजूदा 400 टन की भंडारण सीमा को घटाकर 200 टन करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि इस्मा और राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ (एनएफसीएसएफ) आगामी चीनी सत्र की पेराई 10-15 दिन पहले शुरू करने पर काम कर रहे हैं। तमिलनाडु और कर्नाटक में विशेष पेराई शुरू हो चुकी है। इससे अक्टूबर में करीब 10 लाख टन चीनी उत्पादन की उम्मीद है, जबकि सामान्य उत्पादन करीब चार लाख टन रहता है।
शिरगांवकर ने कहा कि सरकार के कदमों से पिछले कुछ दिनों में कीमतों में नरमी आई है और त्योहारों के मौसम में पर्याप्त आपूर्ति के साथ आगे भी कीमतों में नरमी की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि कच्ची चीनी का आयात आर्थिक रूप से व्यावहारिक है और इसके अक्टूबर तक भारत पहुंचने की उम्मीद है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय