अब यूपीआई का वैश्विक विस्तार करने, पैसा भेजने की लागत घटाने पर करें काम: प्रधानमंत्री मोदी

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अब यूपीआई का वैश्विक विस्तार करने, पैसा भेजने की लागत घटाने पर करें काम: प्रधानमंत्री मोदी

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  • Publish Date - September 8, 2026 / 09:32 PM IST,
    Updated On - September 8, 2026 / 09:32 PM IST

मुंबई, आठ सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को फिनटेक क्षेत्र से एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) की वैश्विक पहुंच बढ़ाने, इसे अन्य देशों की स्थानीय भुगतान प्रणालियों से जोड़ने और प्रवासी भारतीयों के लिए पैसा भेजने की लागत कम करने में मदद करने का आह्वान किया।

मोदी ने यहां वैश्विक फिनटेक सम्मेलन के सातवें संस्करण के उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की 7.8 प्रतिशत की वृद्धि ने पूरी दुनिया को भरोसा दिया है। यह प्रदर्शन ऐसी चुनौतीपूर्ण तिमाही में आया, जब पश्चिम एशिया संघर्ष का असर सबसे अधिक था।

प्रधानमंत्री ने फिनटेक (वित्तीय प्रौद्योगिकी) क्षेत्र से पिछले एक दशक की उपलब्धियों पर संतुष्ट होकर रुकने के बजाय यूपीआई की पहुंच को और व्यापक बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ने को कहा।

उन्होंने कहा, ‘‘इस साल अगस्त तक यूपीआई के जरिये वास्तविक समय में किए जाने वाले भुगतान की संख्या बढ़कर 24.51 अरब हो गई है और अब अगला लक्ष्य यूपीआई की वैश्विक पहुंच का विस्तार करना होना चाहिए।’’

मोदी ने कहा कि ध्यान उन देशों पर होना चाहिए जहां बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं, भारत के साथ व्यापार की मात्रा अधिक है या जो भुगतान प्रणालियों को जोड़ने में भारत के साथ साझेदारी करने के इच्छुक हैं।

मोदी ने कहा, ‘‘यह जरूरी है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय विदेशों में काम करते हैं। वे सबसे अधिक पैसा भेजने वाले लोग हैं। जो पैसा भेजा जाता है, उसका एक हिस्सा लेनदेन लागत में चला जाता है। यूपीआई इस लागत को बचाने में मदद कर सकता है और पैसा परिवारों तक तेजी से भी पहुंच सकता है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि यूपीआई मंच अब 11 देशों में काम कर रहा है और इसे सिंगापुर की स्थानीय भुगतान प्रणाली से भी जोड़ा गया है। इससे दोनों देशों के बीच लेनदेन उसी तरह आसान हो गया है, जैसे किसी स्थानीय इलाके में दो पड़ोसियों के बीच भुगतान किया जाता है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक कार्ड भुगतान फिलहाल अन्य देशों में विकसित प्रणालियों पर चलते हैं, लेकिन भारत के पास अब इसका विकल्प मौजूद है।

मोदी ने कहा, “हम अपने नियम और मानक खुद तय कर सकते हैं और उन्हें दुनिया से जोड़ सकते हैं।”

प्रधानमंत्री ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के शब्दों को दोहराते हुए कहा कि यूपीआई केवल प्रौद्योगिकी की कहानी नहीं है, बल्कि यह सभ्यता से भी जुड़ी है।

मोदी ने कहा कि पिछले कई वर्षों में भुगतान के क्षेत्र में मिली बड़ी सफलताओं के बाद भारतीय फिनटेक उद्योग का अगला अध्याय गैर-भुगतान लेनदेन होना चाहिए। इसके तहत लोगों को बचत उत्पादों, पेंशन, बीमा और अन्य वित्तीय सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि रेहड़ी-पटरी वालों को कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराने की प्रधानमंत्री स्वनिधि (पीएम-स्वनिधि) पहल यूपीआई की वजह से संभव हो सकी। इससे इस योजना के लाभार्थियों की औसत वार्षिक आय में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी से किसी व्यक्ति की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उसके लिए विशेष रूप से तैयार वित्तीय मॉडल उपलब्ध कराना संभव है। फिनटेक क्षेत्र को इस दिशा में काम करना चाहिए और गैर-भुगतान लेनदेन को भी उतना ही आसान बनाना चाहिए, जितना क्यूआर कोड स्कैन करके भुगतान करना है।

मोदी ने कहा कि ‘एजेंटिक’ कृत्रिम मेधा (एआई) क्वांटम टेक्नोलॉजी आदि जैसे प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आगामी विकास नई संभावनाओं के द्वार खोल रहे हैं। उन्होंने फिनटेक क्षेत्र से इन पर ध्यान केंद्रित करने और इनके लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करने का आग्रह किया।

मोदी ने कहा, ‘‘जैसे-जैसे हम इस दिशा में आगे बढ़ेंगे, फिनटेक समुदाय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भारत में साइबर सुरक्षा सर्वोच्च स्तर की हो, उद्योग के पास निजी जानकारी के संरक्षण के अपने मानक हों। साथ ही एक फिनटेक उपभोक्ता संरक्षण सूचकांक भी हो, जो प्रत्येक कंपनी की पारदर्शी तरीके से रेटिंग करे।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को एक मजबूत फिनटेक-नियामक-उद्योग-नवोन्मेष परिवेश बनाने की भी जरूरत है।

वैश्विक मोर्चे पर मोदी ने कहा कि दुनिया संघर्ष और अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है। ऊर्जा और जिंस की आपूर्ति शृंखलाओं पर दबाव है और तेल को लेकर भी चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि के प्रदर्शन को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

मोदी ने कहा कि जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा भारत की रेटिंग को ‘बीबीबी+’ से बढ़ाकर ‘ए-’ करना दुनिया के भारत पर भरोसे को बताता है। तीन दशक में पहली बार है कि जब इस स्तर की रेटिंग मिली है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह बताता है कि भारत की वृद्धि की गति, वृहद आर्थिक स्थिरता और पिछले कुछ वर्षों में किए गए संरचनात्मक सुधार दुनिया को भरोसा दे रहे हैं।”

भाषा रमण अजय

अजय