Online Payment Security | Photo Credit: IBC24
मुंबई: Online Payment Security भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्तीय धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए बृहस्पतिवार को अधिकृत भुगतान को खाते में देरी से ‘क्रेडिट’ करने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ डिजिटल भुगतान (Digital Payments) को रद्द करने का विकल्प भी देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, आरबीआई ने गड़बड़ी की मंशा से ही खोले जाने वाले (म्यूल) खातों की समस्या से निपटने में मदद के लिए एक खाते में कुल क्रेडिट को सीमित करने और 70 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के नागरिकों एवं दिव्यांगों के लिए अधिक मूल्य वाले लेनदेन को प्रमाणित करने के लिए एक भरोसेमंद व्यक्ति नामित करने का भी प्रस्ताव रखा।
Online Payment Security केंद्रीय बैंक ने ग्राहकों को निशाना बनाकर की जा रही धोखाधड़ी की बढ़ती गतिविधियों के बीच बृहस्पतिवार को जारी एक चर्चा पत्र में इन नियमों का प्रस्ताव रखा। आरबीआई ने फरवरी की मौद्रिक नीति बैठक के दौरान विकासात्मक और नियामक नीतियों पर अपने वक्तव्य के हिस्से के रूप में इस चर्चा पत्र की घोषणा की थी। केंद्रीय बैंक ने आठ मई तक इस चर्चा पत्र पर प्रतिक्रिया और सुझाव मांगे हैं। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के मुताबिक, डिजिटल भुगतान से संबंधित धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं। चर्चा पत्र के मुताबिक, 2025 में 28 लाख धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कुल राशि 22,931 करोड़ रुपये थी।
यह संख्या 2024 में दर्ज 24 लाख धोखाधड़ी के मामलों (कुल 22,848 करोड़ रुपये) और 2023 में दर्ज 13.1 लाख धोखाधड़ी के मामलों (कुल 7,465 करोड़ रुपये) से अधिक है। अधिकृत ‘पुश पेमेंट’ के लिए विलंबित क्रेडिट के संबंध में, केंद्रीय बैंक ने 10,000 रुपये से अधिक के लेनदेन को लेकर भुगतानकर्ता के पक्ष में थोड़ी देरी से ‘क्रेडिट’ करने का प्रस्ताव रखा है। ‘पुश पेमेंट’ एक ऐसा लेनदेन है जिसमें भुगतानकर्ता स्वयं धनराशि को प्राप्तकर्ता तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू करता है और उसे अधिकृत करता है।
इस प्रस्ताव के तहत, एक बार जब कोई ग्राहक 10,000 रुपये से अधिक का लेनदेन शुरू करता है, तो एक घंटे की देरी से राशि ‘क्रेडिट’ होने की व्यवस्था लागू की जा सकती है। यह देरी भुगतानकर्ता या प्राप्तकर्ता या दोनों के पक्ष में लागू की जा सकती है। इस अवधि में भुगतानकर्ता का बैंक ग्राहक के खाते से अस्थायी रूप से राशि डेबिट करेगा और भुगतानकर्ता के पास किसी कारणवश लेनदेन रद्द करने का विकल्प रहेगा। इस दायरे में उच्च मूल्य वाले लेनदेन को शामिल करने का प्रस्ताव है क्योंकि 10,000 रुपये से अधिक के लेनदेन मात्रा के हिसाब से रिपोर्ट किए गए धोखाधड़ी के मामलों का लगभग 45 प्रतिशत हैं, लेकिन मूल्य के हिसाब से लगभग 98.5 प्रतिशत हैं।
इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों द्वारा किए जाने वाले उच्च मूल्य वाले डिजिटल लेनदेन के लिए एक भरोसेमंद व्यक्ति द्वारा अतिरिक्त प्रमाणीकरण का भी प्रस्ताव किया है। साथ ही ‘बैंकों के साथ संबंध की प्रकृति के अनुरूप’ खातों में ‘क्रेडिट’ प्राप्त करने का भी प्रस्ताव किया है। इसके अलावा, आरबीआई ने कहा कि ग्राहकों को डिजिटल भुगतान नियंत्रण प्रदान किए जा सकते हैं, जिसमें किसी भी डिजिटल भुगतान मोड के लिए ‘चालू/बंद’ सुविधा, खाता स्तर पर विभिन्न प्रकार के लेनदेन के लिए सीमा निर्धारित करने की सुविधा और एक ही बार में खाते से सभी डिजिटल भुगतान लेनदेन को निष्क्रिय करने की सुविधा (‘किल स्विच’) शामिल होगी।
चर्चा पत्र के अनुसार, खाता स्तर पर निष्क्रिय सुविधा सक्रिय करने से खाताधारक द्वारा निर्धारित अन्य नियंत्रण रद्द हो जाएंगे। एक बार इस सुविधा के सक्रिय हो जाने के बाद, डिजिटल भुगतान को पुनः सक्रिय करने के लिए ‘किल-स्विच’ को निष्क्रिय उचित प्रमाणीकरण/सत्यापन उपायों के बाद डिजिटल माध्यमों से या खाताधारक द्वारा बैंक शाखा में जाकर किया जा सकता है।