ओडिशा जिमनास्टिक्स का अजीब मामला: मृत अध्यक्ष के नाम पर 1.96 करोड़ रुपये का बिल

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ओडिशा जिमनास्टिक्स का अजीब मामला: मृत अध्यक्ष के नाम पर 1.96 करोड़ रुपये का बिल

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  • Publish Date - May 29, 2026 / 04:42 PM IST,
    Updated On - May 29, 2026 / 04:42 PM IST

भुवनेश्वर, 29 मई (भाषा) देश में जहां खेल प्रशासन अक्सर अलग-अलग कारणों से जांच के घेरे में रहता है, वहीं ओडिशा जिमनास्टिक्स संघ का एक अजीब मामला सामने आया है जिसमें संगठन ने एक ऐसे अध्यक्ष के नाम का इस्तेमाल जारी रखा है जिनका एक साल से अधिक समय पहले निधन हो चुका है और उन्हीं के नाम पर राज्य सरकार से फंड मांगने के लिए पत्राचार करता रहा है।

ओडिशा के खेल और युवा सेवा विभाग के कमिश्नर-सह-सचिव को दी गई एक शिकायत में यह सवाल उठाया गया है कि ओडिशा जिमनास्टिक्स संघ (ओजीए) 2026 की राष्ट्रीय जिमनास्टिक्स चैंपियनशिप के लिए राज्य सरकार से लगभग 98 लाख रुपये कैसे हासिल कर पाया जबकि 1.96 करोड़ रुपये से ज्यादा के बिलों और सरकारी कागजों पर अध्यक्ष के तौर पर दिवंगत समीर डे का नाम ही लिखा हुआ था।

यह प्रतियोगिता 25 अप्रैल से तीन मई तक कलिंगा स्टेडियम में आयोजित की गई थी। नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली बीजेडी सरकार में मंत्री रह चुके समीर डे का निधन नवंबर 2024 में हो गया था।

शिकायतकर्ता बालुंकेश्वर साहू ने अपने पत्र में लिखा, ‘‘यह बात काफी हैरान करने वाली है कि संघ का कामकाज एक ऐसे अध्यक्ष के नाम पर चल रहा है जिनका निधन डेढ़ साल पहले ही हो चुका है। ’’

यह पत्र खेल विभाग को 27 मई को मिला था और इसकी एक कॉपी पीटीआई के पास भी मौजूद है।

यह मामला और भी ज्यादा चौंकाने वाला इसलिए हो जाता है क्योंकि राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए तैयार किए गए 1.96 करोड़ रुपये से ज्यादा के बिल में अध्यक्ष के तौर पर समीर डे का नाम लिखा था और उस पर ओजीए के महासचिव अशोक साहू के हस्ताक्षर थे जिसमें तारीख 23 अप्रैल 2026 थी।

आरोप पर जवाब देते हुए साहू ने कहा कि नेतृत्व में बदलाव होने के बावजूद संघ ने पुराने कागजों का इस्तेमाल जारी रखा है।

ओजीए के महासचिव अशोक साहू ने पीटीआई को बताया, ‘‘फिलहाल धीरेन पांडा संघ के प्रभारी के तौर पर काम देख रहे हैं। हमने अभी तक नए लेटरहेड नहीं छपवाए हैं। मौजूदा समिति को अगस्त तक भंग कर दिया जाएगा और राष्ट्रीय खेल संहिता के नियमों का पालन करते हुए नए चुनाव करवाए जाएंगे। ’’

अशोक साहू पहले ही लगातार तीन कार्यकाल पूरे कर चुके हैं इसलिए वह दोबारा चुनाव लड़ने के पात्र नहीं होंगे।

जब ओडिशा के खेल और युवा सेवा विभाग के कमिश्नर-सह-सचिव के कार्यालय से संपर्क किया गया तो उन्होंने इस मामले पर ‘टिप्पणी’ करने से इन्कार कर दिया।

शिकायत में इस बात पर भी सवाल उठाए गए हैं कि एक ही टूर्नामेंट के लिए कई एजेंसियों ने फंड कैसे मंजूर किया।

शिकायत के साथ लगाए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) ने 25 अप्रैल से तीन मई तक भुवनेश्वर में जूनियर और सीनियर राष्ट्रिय चैंपियनशिप की मेजबानी के लिए भारतीय जिमनास्टिक्स महासंघ (जीएफआई) को 50 लाख रुपये मंजूर किए थे। ओजीए ने जीएफआई से इस टूर्नामेंट के लिए 25 लाख रुपये मंजूर करने का अनुरोध किया था और अनुरोध पत्र में समीर डे को संस्था का अध्यक्ष बताया गया था, हालांकि उस पर हस्ताक्षर साहू ने किए थे।

इसके अलावा शिकायत के अनुसार ओडिशा सरकार ने चैंपियनशिप के लिए 1.96 करोड़ रुपये मंजूर किए थे जिसमें से 98 लाख रुपये जारी किए गए थे।

शिकायतकर्ता ने कहा, ‘‘अगर यह फंडिंग ओडिशा जिमनास्टिक्स संघ को उपलब्ध थी, तो यह सवाल उठता है कि आपके विभाग ने पूरा बजट क्यों मंजूर किया। ’’

इस विवाद ने ओजीए के कामकाज को लेकर पुरानी चिंताओं को भी फिर से उठा दिया है। 10 अप्रैल 2025 को भारतीय जिमनास्टिक्स महासंघ को भेजे गए एक पत्र में खेल और युवा सेवा विभाग ने उन आरोपों की ओर इशारा किया था कि राज्य संघ ने लगभग 20 वर्षों से चुनाव नहीं करवाए हैं।

विभाग के पत्र में कहा गया था, ‘‘आरोप है कि राज्य संघ ने पिछले 20 वर्षों से पदाधिकारियों के लिए चुनाव नहीं करवाए हैं। ’’

भाषा नमिता आनन्द

आनन्द