मुंबई, 27 अगस्त (भाषा) उद्योग निकाय पीबीएफआईए ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत का पौध-आधारित प्रोटीन सामग्री का बाजार अगले पांच साल में दोगुना होकर 9,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इसकी वजह यह है कि आज उपभोक्ता कैलोरी-सामग्री वाले भोजन से हटकर खास पोषण वाले तत्वों की ओर बढ़ रहे हैं।
प्लांट बेस्ड फूड इंडस्ट्री एसोसिएशन (पीबीएफआईए) के कार्यकारी निदेशक प्रवीर श्रीवास्तव ने ‘एफआई इंडिया और प्रो-पैक इंडिया 2026’ में कहा, ‘‘देश में कैलोरी को लेकर सतर्कता से पोषण तत्वों को अपनाने की ओर एक स्पष्ट बदलाव देखा जा रहा है। यह प्रोटीन-युक्त भोजन के चुनाव का एक मुख्य कारण बनकर उभर रहा है। पौध-आधारित खाद्य क्षेत्र सालाना लगभग 18 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, जो 7-8 प्रतिशत की वैश्विक वृद्धि दर से काफी अधिक है, जबकि पौध-प्रोटीन सामग्री बाजार का मौजूदा मूल्य लगभग 4,500 करोड़ रुपये है और इसके अगले पांच साल में दोगुना होने की उम्मीद है।’’
उन्होंने कहा कि हालांकि, अभी लगभग 90 प्रतिशत पौध-प्रोटीन सामग्री आयात की जाती है और यह घरेलू विनिर्माताओं के लिए एक बड़ा मौका है।
उन्होंने कहा कि पोषण के अलावा, पौध-आधारित खाद्य अधिक टिकाऊ खाद्य प्रणाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, खासकर तब जब भारत वर्ष 2070 तक अपने शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा पौध-आधारित प्रोटीन को विकास इंजन में से एक के रूप में पहचाने जाने के साथ, बेहतर नीतिगत समर्थन घरेलू क्षमताएं बनाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है। यह विशेष रूप से पूंजी-गहन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है, जहां लगभग 10-15 टन प्रति दिन की क्षमता वाली सामग्री-निष्कर्षण यानी प्रोटीन आदि निकालने की सुविधा स्थापित करने में कम-से-कम 200 से 250 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। भाषा राजेश राजेश अजय
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