खरीफ फसलों की बुवाई के रकबे में आई कमी की भरपाई होने की संभावना : चौहान
खरीफ फसलों की बुवाई के रकबे में आई कमी की भरपाई होने की संभावना : चौहान
नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कहा कि खरीफ फसलों के तहत बुवाई के रकबे में आई कमी की भरपाई की संभावना है क्योंकि बुवाई का काम 15 अगस्त तक चलता है।
उन्होंने कहा कि सरकार बारिश की स्थिति और चल रही बुवाई की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रही है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा आयोजित एक सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए चौहान ने कहा, ‘‘खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अब भी समय है। बुवाई 15 अगस्त तक होती है। जून में कम बारिश हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश हुई है। 20 जुलाई के बाद अच्छी बारिश की संभावना है।’’
मंत्री ने कहा कि फिलहाल खरीफ फसलों के तहत बुवाई का रकबा पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में कम है।
चौहान ने कहा, ‘‘हम स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि किसानों को बीज और उर्वरक (खाद) सहित सभी जरूरी चीजें समय पर मिलें।
जब उनसे पूछा गया कि क्या कमी को पूरा करने के लिए आगे बुवाई में सुधार होगा, तो उन्होंने कहा, ‘‘इसकी संभावना है। मुझे बहुत उम्मीद है।’’
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, कमजोर मानसून के कारण मौजूदा सत्र में 10 जुलाई तक खरीफ फसलों के तहत कुल रकबा 16 प्रतिशत घटकर 531.25 लाख हेक्टेयर रह गया।
खरीफ (गर्मी) फसलों की बुवाई आमतौर पर जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ होती है। हालांकि, इस साल अल नीनो प्रभाव से जुड़े कमजोर मानसून के कारण बुवाई में देरी हुई है।
धान का रकबा एक साल पहले के 125.53 लाख हेक्टेयर की तुलना में 8.63 प्रतिशत घटकर 114.69 लाख हेक्टेयर रह गया।
दलहनों की खेती का रकबा 73.85 लाख हेक्टेयर से 23.31 प्रतिशत घटकर 56.63 लाख हेक्टेयर रह गया।
दलहनों में, अरहर का रकबा एक साल पहले के 28.03 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 19.54 लाख हेक्टेयर, उड़द का 9.34 लाख हेक्टेयर (पहले 13.29 लाख हेक्टेयर) और मूंग का 21.52 लाख हेक्टेयर (पहले 24.08 लाख हेक्टेयर) रहा।
मोटे अनाजों के तहत रकबा पहले के 127.30 लाख हेक्टेयर से 22.47 प्रतिशत घटकर 98.69 लाख हेक्टेयर रह गया।
तिलहन खेती का रकबा 149.18 लाख हेक्टेयर की तुलना में 21 प्रतिशत घटकर 117.83 लाख हेक्टेयर रह गया। तिलहन में, सोयाबीन का रकबा 107.72 लाख हेक्टेयर से 16 प्रतिशत घटकर 90.51 लाख हेक्टेयर रह गया।
गन्ने का रकबा 56.72 लाख हेक्टेयर के मुकाबले थोड़ा अधिक 57.58 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि जूट/मेस्टा का रकबा 6.16 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 6.28 लाख हेक्टेयर हो गया।
नकदी फसलों में, कपास की बुवाई काफी पीछे रही। इस खरीफ सत्र में अब तक इसका रकबा एक साल पहले की समान अवधि के 93.95 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 15.33 प्रतिशत घटकर 79.54 लाख हेक्टेयर रह गया।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय

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