रखरखाव को लेकर बिजलीघरों को नहीं किया जाएगा बंद, 10,000 मेगावाट होगा अतिरिक्त उत्पादन

Ads

रखरखाव को लेकर बिजलीघरों को नहीं किया जाएगा बंद, 10,000 मेगावाट होगा अतिरिक्त उत्पादन

  •  
  • Publish Date - April 10, 2026 / 09:13 PM IST,
    Updated On - April 10, 2026 / 09:13 PM IST

नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) बिजली मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि सरकार ने गर्मियों में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए मरम्मत और रखरखाव के लिए संयंत्रों की अस्थायी रूप से बंदी को टालने और अतिरिक्त क्षमता को चालू करने का फैसला किया है, ताकि करीब 10,000 मेगावाट की अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव पीयूष सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि आम तौर पर बिजली संयंत्रों में सालाना रखरखाव के लिए उसे कुछ समय तक बंद किया जाता है, लेकिन फिलहाल इस बंदी को टाल दिया गया है ताकि उच्च मांग के दौरान बिजली उपलब्धता बनी रहे।

उन्होंने कहा कि इस कदम से 10,000 मेगावाट अतिरिक्त उत्पादन संभव होगा जो पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण एलएनजी आपूर्ति में बाधा से प्रभावित लगभग 8,000 मेगावाट क्षमता की भरपाई करेगा।

सिंह ने कहा कि आयातित कोयले पर आधारित संयंत्रों को पूरी क्षमता से संचालित किया जा रहा है और तापीय संयंत्रों में पर्याप्त कोयला भंडार रखा जा रहा है, ताकि अल्पकालिक आपूर्ति दबाव को संभाला जा सके।

उन्होंने कहा कि देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता 531 गीगावाट से अधिक हो चुकी है और गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ऊपर है।

सरकार की अगले तीन महीनों में 22,361 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़ने की योजना है, जिसमें 3,500 मेगावाट तापीय, 10,000 मेगावाट सौर, 2,400 मेगावाट पवन, 1,900 मेगावाट बैटरी स्टोरेज, 3,461 मेगावाट हाइब्रिड (सौर-पवन), 750 मेगावाट पनबिजली और 250 मेगावाट पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं शामिल हैं।

मंत्रालय ने कहा कि देश के पास लगभग पांच लाख सर्किट किलोमीटर का पारेषण नेटवर्क और 120 गीगावाट से अधिक अंतर-क्षेत्रीय अंतरण क्षमता है, जो विभिन्न क्षेत्रों के बीच बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करता है।

दीर्घकाल में, 2031-32 तक कुल स्थापित क्षमता 874 गीगावाट तक पहुंचने और गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 67 प्रतिशत से अधिक होने का अनुमान है। इसके साथ ही ऊर्जा भंडारण क्षमता को 300 गीगावाट-घंटे और पारेषण नेटवर्क को करीब 6.5 लाख सर्किट किलोमीटर तक बढ़ाने की योजना है।

मंत्रालय ने कहा कि हाल के वर्षों में नए गैस या आयातित कोयले पर आधारित संयंत्रों की योजना नहीं बनाई गई है और घरेलू ईंधन आधारित संसाधनों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण