(सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद, 10 अप्रैल (भाषा) अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद में शनिवार को वाशिंगटन और तेहरान के बीच निर्धारित शांति वार्ता में हिस्सा लेने के लिए शुक्रवार को पाकिस्तान रवाना हो गए। हालांकि, इस्लामाबाद में ईरानी प्रतिनिधिमंडल के आगमन के सिलसिले में फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को वाशिंगटन और तेहरान के बीच दो हफ्ते के सशर्ते युद्ध-विराम की घोषणा करते हुए कहा था कि अमेरिका और ईरान 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में शांति वार्ता करेंगे। उन्होंने ‘एक्स’ पर जारी अपने बयान में अमेरिका और ईरान, दोनों के राष्ट्रपतियों को टैग किया था।
हालांकि, आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, अब दोनों पक्षों के बीच 11 अप्रैल को बातचीत होगी।
इस्लामाबाद के लिए उड़ान भरने से पहले वेंस ने कहा कि वह वार्ता को लेकर उत्सुक हैं और उम्मीद करते हैं कि यह “सकारात्मक” होगी।
उन्होंने कहा, “जैसा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरानी अच्छी नीयत से बातचीत करने को तैयार हैं, तो हम निश्चित रूप से उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं। लेकिन अगर वे हमारे साथ ‘खेल’ खेलने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें पता चलेगा कि वार्ता टीम इतनी भी सहयोगी नहीं है।”
ईरान की अर्धसरकारी समाचार एजेंसी तसनीम की खबर में कहा गया है कि तेहरान ने धमकी दी है कि अगर लेबनान पर इजराइल के हमले बंद नहीं हुए, तो वह इस्लामाबाद में निर्धारिच वार्ता से पीछे हट जाएगा।
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से तय किए गए दो उपायों को अभी तक लागू नहीं किया गया है : लेबनान में युद्ध-विराम और ईरानी संपत्तियों से प्रतिबंध हटाया जाना। वार्ता शुरू होने से पहले इन दोनों शर्तों को पूरा किया जाना चाहिए।”
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने लेबनान में तेहरान के राजदूत मोहम्मद रजा शिबानी के साथ फोन पर बातचीत के बाद कहा कि अमेरिका को युद्ध-विराम संबंधी अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करना चाहिए, जिसमें यह सुनिश्चित करना भी शामिल है कि इसके दायरे में लेबनान भी आएगा।
पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीर मोघदम ने बृहस्पतिवार को पुष्टि की थी कि 10 सदस्यीय ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद आएगा।
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया था, “इजराइल के बार-बार युद्ध-विराम का उल्लंघन करने और राजनयिक पहल को विफल करने के कारण ईरानी जनता में संदेह के बावजूद, माननीय प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के आमंत्रण पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल आज रात इस्लामाबाद में ईरान की ओर से प्रस्तावित 10 बिंदुओं पर वार्ता के लिए पहुंच रहा है।”
हालांकि, लेबनान में बिगड़ती स्थिति के मद्देनजर उन्होंने कुछ घंटों में अपना पोस्ट हटा दिया।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा था कि लेबनान पर इजराइली हमले ने प्रारंभिक युद्ध-विराम का स्पष्ट उल्लंघन किया है और इससे वार्ता निरर्थक हो जाएगी।
सुरक्षा कारणों से अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडलों के आगमन का समय नहीं बताया है, जिससे ‘सस्पेंस’ और गहरा गया है।
अनिश्चितता के बावजूद पाकिस्तान ने दोनों पक्षों की मेजबानी के लिए कमर कस ली है।
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने शुक्रवार को वार्ता के लिए पाकिस्तान आने वाले प्रतिनिधियों और संवाददाताओं के लिए ‘आगमन पर वीजा’ सुविधा की घोषणा की। वार्ता की अवधि के लिए विस्तारित यह सुविधा तीसरे देशों के नागरिकों पर लागू नहीं होती है।
वार्ता के लिए इस्लामाबाद को ‘रेड अलर्ट’ पर रखा गया है और वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडलों की बहुस्तरीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी में 10,000 से अधिक पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है।
भाषा पारुल माधव
माधव