वैश्विक ऊर्जा बदलाव के लिए व्यावहारिक एवं प्रौद्योगिकी-तटस्थ दृष्टिकोण जरूरी : भारत

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वैश्विक ऊर्जा बदलाव के लिए व्यावहारिक एवं प्रौद्योगिकी-तटस्थ दृष्टिकोण जरूरी : भारत

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  • Publish Date - September 16, 2026 / 12:03 PM IST,
    Updated On - September 16, 2026 / 12:03 PM IST

(सीमा हाकू काचरू)

ह्यूस्टन (अमेरिका), 16 सितंबर (भाषा) विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि सभी देशों के लिए ऊर्जा का एक जैसा रास्ता नहीं हो सकता, क्योंकि हर देश के संसाधन, जरूरतें और विकास की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। साथ ही उन्होंने वैश्विक ऊर्जा बदलाव के लिए व्यावहारिक और प्रौद्योगिकी-तटस्थ दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय का भी प्रभार संभाल रहे केंद्रीय मंत्री ने यहां जी20 ऊर्जा मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लिया। मंगलवार को बैठक के दूसरे दिन के बाद जारी मीडिया बयान के अनुसार, उन्होंने तेजी से आर्थिक विस्तार के साथ स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्यों में संतुलन बनाने में भारत की सफलता को रेखांकित किया।

मनोहर लाल ने कहा, ‘‘भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि हर देश के संसाधन, जरूरतें और विकास की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। इसलिए सभी के लिए ऊर्जा का एक जैसा रास्ता नहीं हो सकता। हमें ऐसे व्यावहारिक और प्रौद्योगिकी-तटस्थ दृष्टिकोण की जरूरत है, जो सतत विकास के सिद्धांतों पर आधारित विश्वसनीय एवं सस्ती ऊर्जा सुनिश्चित करे।’’

घरेलू बुनियादी ढांचे में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत के बिजली ग्रिड की आधे से अधिक क्षमता अब गैर-जीवाश्म स्रोतों से संचालित हो रही है।

उन्होंने कहा कि भारत तेजी से नवीकरणीय ऊर्जा को बिजली व्यवस्था में शामिल कर रहा है, पारेषण ग्रिड का विस्तार कर रहा है, ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ा रहा है और परियोजनाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया को सरल बना रहा है, ताकि मंजूरी प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय एवं प्रभावी हो।

मंत्री ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत प्रौद्योगिकी, नवाचार, ऊर्जा और सतत विकास के क्षेत्र में पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी दिशा स्पष्ट है..अपने लोगों के लिए सुरक्षित, सस्ती एवं विश्वसनीय ऊर्जा सुनिश्चित करना और साथ ही टिकाऊ भविष्य का निर्माण करना।’’

अमेरिका की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित सत्रों में दो प्रमुख बातों पर ध्यान दिया गया। पहला, सस्ती आधारभूत बिजली के साथ ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और दूसरा नियामकीय मंजूरियों की प्रक्रिया को तेज तथा सरल बनाना।

बुधवार को होने वाली बैठक के समापन सत्रों के बारे में मंत्री ने कहा कि जी20 के प्रतिनिधि महत्वपूर्ण खनिजों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

उन्होंने कहा कि भारत सुरक्षित एवं विविधीकृत आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए प्रयास करेगा और खासकर विकासशील देशों में स्थानीय प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण तथा मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने की वकालत करेगा।

ह्यूस्टन में अपने अन्य कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में प्रगति की समीक्षा के लिए नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर के दौरे का भी जिक्र किया। उन्होंने भारतीय-अमेरिकी समुदाय की भी सराहना की, जो भारत के साथ मजबूत सांस्कृतिक संबंध बनाए रखते हुए स्थानीय समाज में योगदान दे रहा है।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा