उत्पादकता बढ़ने से कृषि क्षेत्र के एनपीए में और कमी संभव: नाबार्ड चेयरमैन

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उत्पादकता बढ़ने से कृषि क्षेत्र के एनपीए में और कमी संभव: नाबार्ड चेयरमैन

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  • Publish Date - September 10, 2026 / 03:16 PM IST,
    Updated On - September 10, 2026 / 03:16 PM IST

मुंबई, 10 सितंबर (भाषा) नाबार्ड के चेयरमैन शाजी कृष्णन वी ने बृहस्पतिवार को कहा कि कृषि क्षेत्र में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) काफी कम हुई हैं और फसल उत्पादकता बढ़ाने के साथ ऋण सुविधा में सुधार से इसमें और कमी लाई जा सकती है।

यहां वैश्विक वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) सम्मेलन में उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में एनपीए एक समय दोहरे अंक में था, जो अब घटकर एकल अंक यानी 10 प्रतिशत से नीचे आ गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘उत्पादकता बढ़ने से इसमें और सुधार हो सकता है और ऐसा होना जरूरी है। इससे किसानों की कर्ज चुकाने की क्षमता बढ़ेगी। इसके बाद हमें बीमा और ऋण सहायता की जरूरत होगी… हम इन्हीं क्षेत्रों पर काम कर रहे हैं।’’

कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर करीब 3.5 प्रतिशत रहने का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के चेयरमैन ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इसमें तेजी लाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब भारत को बहुत तेजी से आगे बढ़ना है और सरकार का लक्ष्य विकसित भारत है, तो समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ना होगा। अन्यथा किसी न किसी तरह का अंतर पैदा होगा।’’

‘एग्री स्टैक’ के बारे में उन्होंने कहा कि इसे तीन स्तर वाले बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि नाबार्ड ने ऐसा ऋण वितरण तंत्र लागू किया है, जो ‘एग्री स्टैक’ और ‘इंडिया स्टैक’ दोनों को एकीकृत करता है।

उन्होंने कहा कि इससे करीब 7.5 करोड़ किसानों को जरूरत के आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है।

भाषा योगेश अजय

अजय