मुंबई, 18 अगस्त (भाषा) भारत में पेशेवरों का एक बड़ा तबका यह महसूस करता है कि उनके पदनाम और वेतन के बीच तालमेल की कमी है, जो कार्यस्थलों पर पहचान और मिलने वाले प्रतिफल के बीच बढ़ते अंतर को उजागर करता है। एक रिपोर्ट में मंगलवार को यह बात कही गई।
इंडीड की तिमाही भर्ती निगरानी रिपोर्ट के अनुसार, 10 में लगभग छह पेशेवरों ने कहा कि उनका पदनाम उनके वेतन को नहीं दर्शाता है। यह रिपोर्ट देश के 1,211 नियोक्ताओं और 2,533 कर्मचारियों से मिले सुझावों पर आधारित है।
इसमें कहा गया कि साक्षात्कार में शामिल लगभग 80 प्रतिशत कर्मचारियों का मानना था कि उद्योगों में बढ़ा-चढ़ाकर पदनाम देना आम बात हो गई है और उन्होंने अपने सहकर्मियों को वेतन में बिना किसी समान वृद्धि के अधिक वरिष्ठ लगने वाले पदनाम पाते देखा है।
इंडीड इंडिया के प्रबंध निदेशक शशि कुमार ने कहा, ‘‘पदनाम हमेशा एक पेशेवर की पहचान रहा है। पदनाम सार्थक बने रहते हैं क्योंकि वे अवसर और क्षमता का संकेत देते हैं, लेकिन वे तब सबसे अधिक प्रभावी होते हैं जब वे वास्तविक करियर प्रगति को दर्शाते हैं।’’
यह रिपोर्ट इंडीड की ओर से वैल्यूवॉक्स द्वारा मई और जून, 2026 में किए गए एक सर्वेक्षण पर आधारित है।
रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले दो वर्षों में पदनाम में बदलाव पाने वाले लगभग तीन में से एक कर्मचारी ने कहा कि यह या तो बिना किसी वेतन वृद्धि के या फिर पांच प्रतिशत से भी कम की वेतन वृद्धि के साथ मिला। साथ ही 52 प्रतिशत पेशेवरों ने कहा कि वे किसी नए अवसर पर विचार करते समय बेहतर पदनाम के बजाय अधिक वेतन चुनेंगे।
भाषा पाण्डेय अजय
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