बिजली वितरण में नए लाइसेंसधारकों को मौजूदा नेटवर्क के इस्तेमाल की मंजूरी का प्रस्ताव
बिजली वितरण में नए लाइसेंसधारकों को मौजूदा नेटवर्क के इस्तेमाल की मंजूरी का प्रस्ताव
नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) बिजली उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प देने और सेवा गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से बिजली मंत्रालय एक प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिसके तहत नए वितरण लाइसेंसधारकों को निर्धारित शुल्क देकर मौजूदा बिजली नेटवर्क के इस्तेमाल की मंजूरी दी जा सकती है।
मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि बिजली मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई परामर्शदात्री समिति की बैठक में यह प्रस्ताव चर्चा के लिए रखा गया।
बैठक में समानांतर वितरण लाइसेंस व्यवस्था के ढांचे पर विचार किया गया, जिसका उद्देश्य प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और मौजूदा ढांचे का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि बिजली अधिनियम, 2003 के तहत उत्पादन, पारेषण और ट्रेडिंग क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा आई है, लेकिन वितरण क्षेत्र में अभी भी सीमित प्रतिस्पर्धा है।
चर्चा में यह सामने आया कि वर्तमान व्यवस्था में एक ही क्षेत्र में एक से अधिक लाइसेंसधारी की अनुमति दी गई है, लेकिन हर कंपनी को अपना अलग नेटवर्क बनाना पड़ता है। इससे बिजली के खंभों, तारों और सब-स्टेशनों का दोहराव होता है, लागत बढ़ती है और निवेश हतोत्साहित होता है।
प्रस्तावित ढांचे में कहा गया है कि मौजूदा वितरण कंपनियां अपने नेटवर्क का स्वामित्व और संचालन जारी रखेंगी, जबकि नई कंपनियां नियामकीय शुल्क देकर उसी नेटवर्क का उपयोग कर सकेंगी।
इसके साथ ही, राज्य विद्युत नियामक आयोग अनुमति होने पर नई कंपनियां अपना अलग नेटवर्क भी विकसित कर सकेंगी।
बिजली मंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था को लागू करने का विस्तृत ढांचा राज्य विद्युत नियामक आयोग तैयार करेंगे, ताकि पारदर्शिता, निष्पक्षता और भेदभावरहित पहुंच सुनिश्चित हो सके।
सरकार ने स्पष्ट किया कि इस प्रस्ताव से मौजूदा वितरण कंपनियों और उनके कर्मचारियों के हित सुरक्षित रहेंगे। साथ ही, सभी कंपनियों पर सार्वभौमिक सेवा दायित्व लागू रहेगा, जिससे वे केवल लाभदायक उपभोक्ताओं तक ही सीमित नहीं रह सकेंगी।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
रमण

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