लंदन, 18 अगस्त (भाषा) पाकिस्तानी अधिकारियों ने धमकी दी है कि अगर ब्रिटेन बच्चों को बरगला कर उनका यौन शोषण करने के मामले में दोषी करार दिये गए एक गिरोह के सरगना को अगर निर्वासित करने की कोशिश करता है, तो वे प्रवासन और सुरक्षा से जुड़े व्यापक द्विपक्षीय मुद्दों पर इस यूरोपीय देश के साथ सहयोग करना बंद कर देंगे। ब्रिटिश मीडिया ने मंगलवार को यह दावा किया।
शबीर अहमद को 2012 में बच्चियों के साथ दुष्कर्म और यौन अपराधों के कई मामलों में सजा सुनाई गई थी और हाल में उसे कारागार से रिहा किया गया है। ब्रिटेन की गृहमंत्री शबाना महमूद ने अहमद को पाकिस्तान निर्वासित करने में आ रही कानूनी अड़चन को दूर करने के लिए पिछले महीने ब्रिटिश संसद में कानून बदलने की प्रक्रिया शुरू की।
ब्रिटेन से प्रकाशित ‘द डेली टेलीग्राफ’ अखबार ने पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि अहमद ‘‘पूरी तरह से ब्रिटेन की अंदरूनी समस्या’’ है क्योंकि उसने न केवल अपनी पाकिस्तानी नागरिकता छोड़ दी है, बल्कि अपनी वयस्क जिंदगी का अधिकतर समय भी ब्रिटेन में बिताया है।
अखबार के मुताबिक इस्लामाबाद के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘शबीर अहमद मामले में ब्रिटेन का लगातार दबाव, इसमें शामिल कानूनी और कूटनीतिक पेचीदगियों को समझने के बजाय घरेलू राजनीतिक दबावों का नतीजा लगता है।’’
अधिकारी ने कहा, ‘‘इससे दोनों देशों के बीच व्यापक द्विपक्षीय सहयोग के कमजोर होने का खतरा है। हमारा मानना है कि ब्रिटिश सरकार के सामने देश के भीतर मौजूद राजनीतिक चुनौतियों की वजह से दोनों देशों के रिश्तों को खतरे में नहीं डाला जाना चाहिए। आइए, एक-दूसरे की सुरक्षा को लेकर राजनीति न करें और ईमानदारी बरतें।’’
महमूद ने जुलाई में ब्रिटिश संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स को बताया कि वह 50 साल से अधिक समय पहले ब्रिटेन आए गंभीर अपराधियों से निपटने के लिए आव्रजन अधिनियम 1971 में संशोधन की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही हैं।
दक्षिण एशियाई मूल की कैबिनेट मंत्री ने उस समय सांसदों से कहा था, ‘‘यह (कानून) लंबे समय से ब्रिटेन में रह रहे लोगों को सुरक्षा देता है, लेकिन स्पष्ट तौर पर, शबीर अहमद जैसे मामलों में निर्वासन के रास्ते में रुकावट नहीं बनना चाहिए।’’
अखबार ने एक अन्य पाकिस्तानी अधिकारी को उद्धृत किया, ‘‘पाकिस्तान ने लगातार ब्रिटेन की अलग-अलग सरकारों के साथ मिलकर काम किया है। इसमें न केवल उन लोगों की वापसी को मंजूरी देना शामिल है जिनकी शरण की अर्ज़ी नामंज़ूर हो गई थी या जो आव्रजन नियमों का उल्लंघन कर रहे थे और जिनके पास ब्रिटेन में रहने का कोई कानूनी रास्ता नहीं बचा था, बल्कि अपनी संधि की शर्तों से आगे बढ़कर उन लोगों की वापसी या उन्हें सौंपने में मदद करना भी शामिल है जो आपराधिक मामलों में ब्रिटिश प्राधिकारियों को तलाश हैं।’’
अधिकारी ने चेतावनी दी, ‘‘ ब्रिटिश सरकार ने बार-बार हमसे कहा है कि यह ‘स्वर्ण मानक’सहयोग है। अगर शबीर अहमद का मुद्दा पाकिस्तान पर थोपा गया, तो सभी क्षेत्रों में इन रिश्तों पर असर पड़ सकता है। यह एकतरफा मामला नहीं हो सकता।’’
एक तीसरे अधिकारी ने अखबार को बताया कि अहमद ‘‘असल में ब्रिटिश समाज की ही उपज है’’।
अधिकारी ने कहा, ‘‘वह 75 साल का व्यक्ति है जो 60 से अधिक सालों से ब्रिटेन में रह रहा है… इसलिए यह समझना मुश्किल है कि ब्रिटेन पाकिस्तान से ऐसे व्यक्ति की जिम्मेदारी लेने की उम्मीद क्यों करता है, जो ब्रिटेन में ही पला-बढ़ा, रहा और जिसने वहीं अपराध किए, जबकि इस मामले को अपने ही अधिकार क्षेत्र में सुलझाया जा सकता है।’’
ब्रिटिश अदालत द्वारा अहमद को 22 साल की जेल की सजा सुनाए जाने के बाद उसकी ब्रिटिश नागरिकता रद्द कर दी गई थी। हाल ही में ‘प्रोबेशन सर्विस’ के एक पत्र से पीड़ितों को उसकी सज़ा पूरी होने के बाद उसकी रिहाई के बारे में जानकारी दी गई।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान खुलासा हुआ कि दोषी दुष्कर्मी की शिकार लड़कियां उसे ‘डैडी’ कहकर बुलाती थीं। वह नौ लोगों के उस गिरोह का सरगना था जो किशोर लड़कियों को बहला-फुसलाकर उनका यौन शोषण करते थे। गिरोह के सदस्य लड़कियों का भरोसा जीतने के लिए उन्हें बाहर का खाना और सिगरेट देते थे, और फिर दुष्कर्म करने से पहले शराब पिलाते थे।
भाषा धीरज वैभव
वैभव