मुंबई, 18 अगस्त (भाषा) भारतीय पायलट प्राधिकरण (एफआईपी) ने मंगलवार को नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से आग्रह किया कि वह पायलट के नशे में होने का पता लगाने की प्रक्रिया में पेशाब के नमूने की जांच की मौजूदा व्यवस्था के साथ-साथ ‘‘लार की जांच’’ को भी शामिल करने पर विचार करे।
डीजीसीए को दिए गए सुझाव में एफआईपी ने पायलट की मादक पदार्थ की औचक जांच दर को मौजूदा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने की भी मांग की है।
इस महीने की शुरुआत में टाटा समूह के स्वामित्व वाली एअर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान के पायलट की मेडिकल जांच में पता चला था कि वह नशे की हालत में था। इसके बाद एअर इंडिया ने अपने करीब 5,000 पायलट की अनिवार्य रूप से मादक पदार्थ जांच कराने का आदेश दिया था।
फिलहाल डीजीसीए की व्यवस्था के तहत एक विशेष नागरिक उड्डयन आवश्यकता के अनुसार पेशाब की जांच का प्रावधान है।
एफआईपी के अध्यक्ष सी. एस. रंधावा ने सुझाव में कहा, ‘‘पेशाब जांच की मौजूदा प्रणाली के लिए नियामकीय और प्रयोगशाला व्यवस्था स्थापित है, लेकिन एफआईपी का मानना है कि भारतीय विमानन संचालन के बढ़ते स्तर को देखते हुए जांच के अतिरिक्त तरीकों पर विचार किया जाना चाहिए। इससे जांच की क्षमता बढ़ सकती है, संचालन में बाधा कम हो सकती है और हवाई अड्डों तथा अन्य परिचालन स्थानों पर तेजी से जांच की सुविधा मिल सकती है।’’
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