जितना पहले कटाएंगे रेल टिकट, उतना कम हो सकता है किराया

जितना पहले कटाएंगे रेल टिकट, उतना कम हो सकता है किराया

जितना पहले कटाएंगे रेल टिकट, उतना कम हो सकता है किराया
Modified Date: November 29, 2022 / 08:44 pm IST
Published Date: January 19, 2018 1:11 pm IST

नई दिल्ली। अगर आप रेल से सफर करते हैं तो ये खबर आपके काम की है। अब अगर आपकी यात्रा का प्लान बन चुका है तो पहले से टिकट कटा लें, कारण ये है कि बहुत जल्दी ऐसी व्यवस्था लागू हो सकती है, जिसमें जितना पहले टिकट लेंगे, उतना कम किराया देना होगा। फिलहाल विमानों में ये व्यवस्था लागू है, जब आप पहले से टिकट लेते हैं तो किराया कम लगता है और यात्रा की तारीख के जितना करीब लेते हैं, किराया बढ़ता जाता है। फिलहाल राजधानी, दुरंतो, शताब्दी, हमसफर और प्रीमियम ट्रेनों में जितनी देर से टिकट कटाते हैं, उतने ज्यादा पैसे लगते हैं, लेकिन सीटें खाली भी रह जाएं तो यात्रियों को उसका फायदा नहीं मिल पाता। रेलवे को ज्यादा किराया वसूलने से जितने पैसे आते हैं, इन्हीं ट्रेनों में सीटों के खाली रह जाने से उतना ही नुकसान भी हो जाता है। इन्हीं खाली सीटों को ध्यान में रखते हुए रेलवे की किराया समीक्षा समिति ने ये रेल मंत्रालय से ये सिफारिश की है कि खाली सीटों की संख्या के अनुसार किराए में छूट का प्रावधान किया जाए। 

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रेल किराया समीक्षा समिति की सिफारिश के मुताबिक छूट की ये सीमा 20 फीसदी से लेकर 50 फीसदी तक की जा सकती है। यानी अगर अभी रायपुर से दिल्ली एसी थ्री टायर का किराया 1650 रुपये है तो ये 825 रुपये तक सस्ती हो सकती है। समिति की सिफारिश को सीधे शब्दों में इस तरह समझ सकते हैं कि किसी ट्रेन में जितनी कम सीटें खाली रहेंगी, यात्रियों को किराया उतना ज्यादा देना होगा और जितनी ज्यादा सीटें खाली होंगी, यात्रियों को उतना कम किराया देना होगा। जाहिर है कि जो पहले टिकट कटाएंगे, उन्हें ज्यादा सीटें खाली मिलेंगी और इसीलिए उन्हें कम किराया देना होगा। रेल किराया समीक्षा समिति ने एक और अहम सिफारिश की है। इसमें ये कहा गया है कि अगर चार्ट बन जाए और सीटें फिर भी खाली हों, उस स्थिति में भी यात्रियों को किराया में छूट दी जा सकती है। 

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दूसरी ओर, समिति ने यात्रियों के साथ-साथ रेलवे के फायदे के लिए ये सिफारिश भी की है कि जो यात्री लोअर बर्थ यानी निचली बर्थ की मांग करते हैं, उनसे वो ज्यादा किराया वसूल सकती है। ये बिल्कुल विमान सफर की तरह है, जहां आगे की सीटों, विंडो सीट या ज्यादा लेग स्पेस वाली सीटों के लिए मुसाफिरों को अतिरिक्त पैसे देने होते हैं। समिति ने फेस्टिवल सीज़न के लिए भी अतिरिक्त किराया वसूलने की सिफारिश की है। वैसे इन सिफारिशों पर रेलवे बोर्ड और रेल मंत्रालय की मुहर लगनी बाकी है और इसके बाद ही ये साफ हो पाएगा कि रेल टिकटिंग में किस तरह के बदलाव किए जाने हैं और ये वाकई यात्रियों के हित में किस हद तक होंगे?

 

वेब डेस्क, IBC24


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