अमेरिकी शोध संस्थान की मोदी सरकार को सलाह, सभी सार्वजनिक उपक्रमों का करें निजीकरण
अमेरिकी शोध संस्थान की मोदी सरकार को सलाह, सभी सार्वजनिक उपक्रमों का करें निजीकरण
(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, 21 जुलाई (भाषा) अमेरिकी शोध संस्थान सीएसआईएस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के लिए सुधारों का 30-सूत्री एजेंडा सुझाया है, जिसमें सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (सीपीएसई) का 10 वर्षों में निजीकरण करने की योजना भी शामिल है।
‘सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज’ (सीएसआईएस) की इस रिपोर्ट में सुझाए गए 30 सुधारों में से तीन को मोदी सरकार पहले ही लागू कर चुकी है। इनमें जन विश्वास विधेयक 2.0 पारित करना, परमाणु क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलना और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों का सरलीकरण शामिल हैं।
रिपोर्ट में सुझाए गए अन्य प्रस्तावों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के स्रोत एवं गंतव्य पर वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करना और भारतीय कंपनियों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की सीमा बढ़ाना शामिल हैं।
सीएसआईएस में भारत और उभरते एशिया अर्थशास्त्र के चेयर रिचर्ड रोसो ने कहा, ‘‘सरकार के पास बड़े सुधारों को आगे बढ़ाने की गुंजाइश दिखती है और हाल के परमाणु एवं बीमा क्षेत्र के सुधार इस दिशा में संभावनाएं दिखाते हैं।’’
इस रिपोर्ट में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाने, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी घटाकर 33 प्रतिशत करने, पेट्रोलियम उत्पादों, शराब, रियल एस्टेट एवं बिजली को जीएसटी के दायरे में लाने और एक एकीकृत ऑनलाइन विवाद समाधान मंच स्थापित करने के सुझाव भी दिए गए हैं।
इसमें सीमा शुल्क, डीजीएफटी, बंदरगाहों, बैंकों और पोत परिवहन कंपनियों से जुड़ी प्रक्रियाओं के एकीकरण के लिए एक ही पोर्टल बनाने, बैंकों पर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को कर्ज देने की अनिवार्यता हटाने और विभिन्न राज्यों में पंजीकृत करदाताओं के लिए जीएसटी ऑडिट की जटिलता कम करने की भी सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और कारोबारी माहौल सुधारने के लिए घरेलू आर्थिक सुधार आगे की वृद्धि एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
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