आरबीआई ने महंगाई के जोखिमों के बीच ‘देखो और इंतजार करो’ का रुख अपनाया: बैठक ब्योरा

आरबीआई ने महंगाई के जोखिमों के बीच ‘देखो और इंतजार करो’ का रुख अपनाया: बैठक ब्योरा

आरबीआई ने महंगाई के जोखिमों के बीच ‘देखो और इंतजार करो’ का रुख अपनाया: बैठक ब्योरा
Modified Date: August 19, 2026 / 07:51 pm IST
Published Date: August 19, 2026 7:51 pm IST

नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने मोटे तौर पर इस बात को स्वीकार किया है कि खाद्य और ईंधन की बढ़ती कीमतों से महंगाई का जोखिम बना हुआ है, लेकिन व्यापक स्तर पर कीमतों में तेजी के पर्याप्त संकेत नहीं हैं। ऐसे में समिति ने ‘देखो और इंतजार करो’ के रुख के साथ ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने का निर्णय किया। बुधवार को जारी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के ब्योरे से यह जानकारी मिली।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय एमपीसी ने तीन से पांच अगस्त को हुई बैठक में सर्वसम्मति से नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया। समिति ने अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा लागत में हुई बढ़ोतरी का व्यापक महंगाई दबाव पर असर देखने के लिए इंतजार करने का विकल्प चुना।

एमपीसी ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। घरेलू मांग, निवेश और निर्यात ने आर्थिक वृद्धि को सहारा दिया है।

हालांकि, वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, मानसून और अल नीनो से जुड़े जोखिमों के कारण अनिश्चितता बनी हुई है।

बैठक के ब्योरे के अनुसार, मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने, अनिश्चितता बढ़ने और अब तक असामान्य मानसून के बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है।

उन्होंने कहा कि आपूर्ति पक्ष से जुड़े झटके के मामले में मौद्रिक नीति में बदलाव तब जरूरी होता है, जब इसके कारण महंगाई व्यापक रूप लेने लगे, मुद्रास्फीति की संभावनाएं अस्थिर हो जाएं या महंगाई लंबे समय तक बनी रहे। हालांकि, जोखिम मौजूद हैं, लेकिन अभी तक इसके सीमित प्रमाण ही मिले हैं।

मल्होत्रा ने कहा, ‘‘वह नीतिगत दर में किसी भी बदलाव के लिए महंगाई के रुख पर और स्पष्टता आने का इंतजार करना चाहेंगे। इसके लिए यह देखना जरूरी होगा कि महंगाई के वास्तविक आंकड़े मौजूदा या ऊंचे स्तर पर कितने समय तक बने रहते हैं, पूर्वानुमान क्या संकेत देते हैं और महंगाई किस स्तर पर सामान्य होकर स्थिर होती है।’’

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि खाद्य पदार्थों, ईंधन और अन्य लागत में बढ़ोतरी के कारण महंगाई के व्यापक रूप लेने और मुद्रास्फीति संबंधी संभावनाओं के अस्थिर होने का जोखिम बना हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि ये जोखिम वास्तविक रूप लेते हैं तो नीति को सख्त करने की आवश्यकता पड़ सकती है।’’

आरबीआई की डिप्टी गवर्नर और एमपीसी सदस्य पूनम गुप्ता ने कहा कि वैश्विक घटनाक्रम और मौसम संबंधी जोखिमों के कारण बनी अनिश्चितता को देखते हुए कुछ और समय तक इंतजार करना बेहतर होगा। इससे मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं के स्पष्ट होने, आपूर्ति पक्ष की महंगाई के स्थायी होने की स्थिति समझने और वैश्विक मोर्चे पर अधिक स्पष्टता मिलने में मदद मिलेगी।

आरबीआई के कार्यकारी निदेशक और एमपीसी सदस्य इंद्रनील भट्टाचार्य ने कहा कि अत्यधिक अनिश्चित माहौल में भविष्य की नीतिगत दिशा को लेकर स्पष्ट संकेत देने के बजाय नीति रूपरेखा के आधार पर मार्गदर्शन अधिक उपयोगी होगा।

उन्होंने कहा कि खाद्य और ईंधन महंगाई में तेजी का असर अभी सीमित रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि महंगाई अभी व्यापक नहीं हुई है।

एमपीसी के तीन बाहरी सदस्यों…नागेश कुमार, सौगत भट्टाचार्य और राम सिंह…ने भी रेपो दर में बदलाव नहीं करने के पक्ष में मतदान किया।

नागेश कुमार ने कहा कि अर्थव्यवस्था की वृद्धि और महंगाई के अनुमान में मामूली सुधार को लेकर सतर्कता कम नहीं की जानी चाहिए। अल नीनो के कारण कृषि क्षेत्र का परिदृश्य अब भी अनिश्चित बना हुआ है, हालांकि जुलाई में देश के कई हिस्सों में मानसून की कमी की स्थिति में सुधार हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति से जुड़ी चिंताएं अभी खत्म नहीं हुई हैं। भारत ने आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाकर स्थिति से निपटने के प्रयास किए हैं, लेकिन व्यापार नीति से जुड़ी अनिश्चितताएं बढ़ी हैं।’’

सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि पहले के अनुकूल स्तर से महंगाई के सामान्य होने के अनुमान को देखते हुए वृद्धि और महंगाई के बीच संतुलन पर लगातार निगरानी जरूरी होगी, ताकि नीतिगत दर में बदलाव का उचित समय तय किया जा सके।

राम सिंह ने कहा कि करीब सात प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर के बावजूद मांग आधारित महंगाई के स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। लगातार कई तिमाहियों तक मूल (कोर) महंगाई चार प्रतिशत से नीचे रहने से संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था की संभावित वृद्धि दर सात प्रतिशत से ऊपर हो सकती है।

उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति के लिहाज से इन सभी पहलुओं को समझना महत्वपूर्ण है और आने वाले आंकड़े काफी अहम होंगे।

भाषा रमण अजय

अजय


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