डिजिटल भुगतान में उछाल के बीच नकदी के बढ़ते इस्तेमाल के विरोधाभास से जूझ रहा आरबीआई: डिप्टी गवर्नर

डिजिटल भुगतान में उछाल के बीच नकदी के बढ़ते इस्तेमाल के विरोधाभास से जूझ रहा आरबीआई: डिप्टी गवर्नर

डिजिटल भुगतान में उछाल के बीच नकदी के बढ़ते इस्तेमाल के विरोधाभास से जूझ रहा आरबीआई: डिप्टी गवर्नर
Modified Date: August 18, 2026 / 08:30 pm IST
Published Date: August 18, 2026 8:30 pm IST

मुंबई, 18 अगस्त (भाषा) डिजिटल भुगतान में भारी उछाल के बावजूद प्रचलन में नकदी के बढ़ने के विरोधाभास से भारतीय रिजर्व बैंक जूझ रहा है। केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर एस सी मुर्मू ने यह बात कही।

उन्होंने 13 अगस्त को जकार्ता में बैंक इंडोनेशिया द्वारा आयोजित नकदी पारिस्थितिकी तंत्र पर एक वैश्विक संगोष्ठी में कहा कि इस विरोधाभास की वजह से भविष्य की मुद्रा मांग का अनुमान लगाना कठिन हो गया है।

उन्होंने इसे नकदी का विरोधाभास करार दिया और कहा, ‘‘डिजिटल भुगतान को तेजी से अपनाए जाने के कारण व्यक्तिगत लेनदेन में नकदी की हिस्सेदारी घटने के बावजूद प्रचलन में मौजूद मुद्रा दहाई अंक की दर से बढ़ रही है।’’

उन्होंने कहा कि इस वजह से भविष्य में नकदी की मांग का अनुमान लगाना कठिन हो गया है, जिससे उत्पादन और वितरण क्षमता के लिए आरबीआई की योजना जटिल हो जाती है। उन्होंने आगे जोड़ा कि भारतीय केंद्रीय बैंक आमतौर पर हर साल मुद्रा मांग पर पांच साल का अग्रिम अनुमान तैयार करता है।

वैश्विक सभा को संबोधित करते हुए मुर्मू ने कहा, ‘‘यदि आप में से किसी को इसकी वजह पता करने का कोई अच्छा तरीका मिला है, तो मैं अपनी चर्चा के दौरान इसे वास्तव में सुनना चाहूंगा।’’

उल्लेखनीय है कि आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार प्रचलन में मुद्रा वित्त वर्ष 2024-25 के 41.23 लाख करोड़ रुपये से लगभग 12 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 के अंत में 41.6 लाख करोड़ रुपये हो गई। इस दौरान यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से भुगतान की मात्रा में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय


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