वैश्विक अनिश्चितता के बीच आरबीआई ने नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा

वैश्विक अनिश्चितता के बीच आरबीआई ने नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा

वैश्विक अनिश्चितता के बीच आरबीआई ने नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा
Modified Date: August 5, 2026 / 10:24 am IST
Published Date: August 5, 2026 10:24 am IST

मुंबई, पांच जुलाई (भाषा) वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को उम्मीद के मुताबिक प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर कायम रखा।

इसके साथ आरबीआई ने ‘तटस्थ’ रुख को भी बरकरार रखा है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा।

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि के अनुमान को 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। वहीं मुद्रास्फीति के अनुमान को 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5.0 प्रतिशत कर दिया है।

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी देते हुए कहा, ‘‘एमपीसी ने मौजूदा परिस्थितियों पर गौर करते हुए आम सहमति से नीतिगत दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का निर्णय किया है।’’

रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। आरबीआई के रेपो दर को यथावत रखने के फैसले से आवास, वाहन और वाणिज्यिक कर्ज की मासिक किस्त जस-की-तस बने रहने की संभावना है।

चालू वित्त वर्ष की तीसरी मौद्रिक समीक्षा पेश करते हुए मल्होत्रा ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष प्रमुख व्यापारिक मार्गों को बाधित कर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ है।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल फरवरी से दिसंबर, 2025 तक रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की गई थी। फरवरी, अप्रैल और जून की द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर को यथावत रखा गया।

भाषा रमण अजय

अजय निहारिका

निहारिका


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