Liquor Brand Ban: शराब के शौकीनों को बड़ा झटका, भारत में अब नहीं बिकेंगे ये ब्रांड्स, इस वजह से FSSAI ने ब्रिकी पर लगाया बैन

शराब के शौकीनों को बड़ा झटका, भारत में अब नहीं बिकेंगे ये ब्रांड्स, FSSAI Ban on Several Liquor Brands

Liquor Brand Ban: शराब के शौकीनों को बड़ा झटका, भारत में अब नहीं बिकेंगे ये ब्रांड्स, इस वजह से FSSAI ने ब्रिकी पर लगाया बैन
Modified Date: August 4, 2026 / 10:54 pm IST
Published Date: August 4, 2026 10:53 pm IST

नई दिल्ली। Ban on Liquor Brands शराब के शौकीनों के बीच लोकप्रिय कई बड़े ब्रांड इन दिनों खाद्य सुरक्षा नियामक के निशाने पर हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कुछ शराब उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया है। कार्रवाई के दायरे में Old Monk, Antiquity Blue, Royal Challenge और Bagpiper Deluxe जैसे चर्चित ब्रांडों के कुछ उत्पाद शामिल हैं। मामला शराब में इस्तेमाल किए गए फ्लेवरिंग एजेंट से जुड़ा है। FSSAI की जांच में कुछ उत्पादों में ऐसे बाहरी आर्टिफिशियल या ‘नेचर-आइडेंटिकल’ फ्लेवर पाए जाने की बात कही गई है, जिनका इस्तेमाल संबंधित शराब के प्राकृतिक स्वाद और खुशबू को दोहराने के लिए किया गया। नियामक के अनुसार, रम में रम का फ्लेवर या व्हिस्की में व्हिस्की जैसा फ्लेवर मिलाना मौजूदा खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है।

किन उत्पादों पर कार्रवाई? (Ban on Liquor Brands)

Ban on Liquor Brands: FSSAI की कार्रवाई में अलग-अलग राज्यों में निर्मित कुछ उत्पाद शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में निर्मित Antiquity Blue Whisky और Royal Challenge Whisky के कुछ उत्पादों पर बिक्री रोकने का आदेश दिया गया है। इसी तरह Bagpiper Deluxe Whisky और Old Cask Deluxe XXX Rum को लेकर भी कार्रवाई की गई है।
महाराष्ट्र में मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर की इकाई में तैयार Old Monk के तीन वैरिएंट भी कार्रवाई के दायरे में आए हैं। Reuters के अनुसार, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि आदेश केवल संबंधित निर्माण इकाइयों से निकले उत्पादों तक सीमित है या उन्हीं ब्रांडों के दूसरे राज्यों में बने उत्पाद भी इसके दायरे में आएंगे।

क्या है फ्लेवर को लेकर पूरा विवाद?

FSSAI के मुताबिक शराब में कुछ प्राकृतिक फ्लेवरिंग पदार्थों के इस्तेमाल की अनुमति है, लेकिन नियामक की जांच में ऐसे मामलों का पता चला जहां उत्पाद के अपने ही स्वाद की नकल करने वाले बाहरी फ्लेवर जोड़े गए। FSSAI का कहना है कि इससे शराब के वास्तविक निर्माण और परिपक्वता की प्रक्रिया को दरकिनार करने का रास्ता खुल सकता है।
जुलाई में भी FSSAI ने शराब निर्माता कंपनियों को अनधिकृत फ्लेवर, उम्र से जुड़े भ्रामक दावों और ब्लेंड की उम्र बताने से जुड़े नियमों के पालन को लेकर नोटिस जारी किए थे।

कंपनियों ने भी उठाए सवाल

इस कार्रवाई के बाद उद्योग की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। Diageo India की यूनाइटेड स्पिरिट्स ने कहा है कि संबंधित उत्पादों के लेबल मौजूदा कानूनों के अनुरूप हैं और इस मुद्दे को उद्योग-व्यापी चिंता के तौर पर उठाया जा रहा है। कंपनी ने अपने एक उत्पाद से जुड़े FSSAI आदेश को अदालत में चुनौती भी दी है। FSSAI की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब नियामक खाद्य और पेय क्षेत्र में नियमों के पालन को लेकर जांच तेज कर रहा है। अब नजर इस बात पर है कि इन आदेशों का संबंधित ब्रांडों की बिक्री और शराब उद्योग पर आगे क्या असर पड़ता है।

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