आरबीआई ने विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए कदम उठाए, सरकारी प्रतिभूतियों का दायरा बढ़ाया

Ads

आरबीआई ने विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए कदम उठाए, सरकारी प्रतिभूतियों का दायरा बढ़ाया

  •  
  • Publish Date - June 5, 2026 / 05:32 PM IST,
    Updated On - June 5, 2026 / 05:32 PM IST

(तस्वीर के साथ)

मुंबई, पांच जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ाने के उद्देश्य से कई कदमों की शुक्रवार को घोषणा की। इनमें विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों के दायरे का विस्तार शामिल है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, ‘‘ सरकारी प्रतिभूतियों के लिए पूर्ण पहुंच मार्ग (एफएआर) के तहत हम ‘‘निर्दिष्ट प्रतिभूतियों’’ के दायरे का विस्तार कर रहे हैं, जिसमें 15, 30 और 40 वर्ष की अवधि वाली सभी नई सरकारी प्रतिभूतियां शामिल होंगी। इसके अलावा सामान्य मार्ग के तहत निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए अल्पकालिक निवेश, कोष रखने की सीमा और व्यक्तिगत प्रतिभूति सीमा से जुड़े प्रतिबंध भी हटा दिए हैं।’’

उन्होंने कहा कि ये उपाय सरकार द्वारा दिए गए कर लाभों के साथ मिलकर विदेशी पूंजी को सरकारी उधारी के लिए आकर्षित करने में मदद करेंगे।

सरकार ने शुक्रवार को अध्यादेश जारी कर विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर समाप्त कर दिया है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मल्होत्रा ने कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है तथा इससे भुगतान संतुलन और मजबूत होगा।

आरबीआई ने प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) और भारत के प्रवासी नागरिक (ओसीआई) के लिए सूचीबद्ध इक्विटी के उत्पादों में निवेश सीमा भी बढ़ा दी है जिसके लिए प्रतिभूति नियामक के साथ पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी।

यह सुविधा अब विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों (पीआरओआई) के लिए है, जिससे भारतीय शेयर बाजारों तक उनकी पहुंच व्यापक हो गई है।

इन उपायों से डॉलर प्रवाह की मात्रा में वृद्धि के बारे में पूछे जाने पर गवर्नर ने कहा कि आरबीआई किसी विशिष्ट राशि का लक्ष्य नहीं बना रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि हमें विदेशी पूंजी का अच्छा प्रवाह मिलने की उम्मीद है।’’

आरबीआई के इन कदमों और सरकारी कर छूट के साथ भारत के संप्रभु ऋण बाजार में विदेशी भागीदारी बढ़ने और सरकार की उधारी कम लागत पर होने की उम्मीद है। विदेशी कर्ज को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा जुटाए गए बाह्य यानी विदेशों से वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) के लिए 30 सितंबर, 2026 तक रियायती विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा प्रदान करेगा।

इसके अलावा, अधिकृत डीलर बैंकों को एक अस्थायी सुविधा के तहत पात्र बनाया गया है, जिसके अंतर्गत आरबीआई 30 सितंबर, 2026 तक जुटाई गई तीन से पांच वर्ष की नई विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (बैंक) जमा पर पूर्ण जोखिम बचाव से जुड़ी लागत वहन करेगा।

आरबीआई ने निर्यात आय की प्राप्ति की समय सीमा को बढ़ाकर नौ महीने किये जाने का भी प्रस्ताव किया।

ये उपाय वैश्विक अस्थिरता के बीच टिकाऊ विदेशी पूंजी प्रवाह आकर्षित करने, बाहरी वित्तीय स्थितियों को सुदृढ़ बनाने एवं भारत के भुगतान संतुलन को मजबूत करने के उद्देश्य से किए गए हैं।

भाषा निहारिका रमण

रमण