आरबीआई का बही-खाता वित्त वर्ष 2025-26 में 20.6 प्रतिशत बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये

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आरबीआई का बही-खाता वित्त वर्ष 2025-26 में 20.6 प्रतिशत बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये

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  • Publish Date - May 29, 2026 / 01:39 PM IST,
    Updated On - May 29, 2026 / 01:39 PM IST

मुंबई, 29 मई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का बही-खाता वित्त वर्ष 2025-26 में 20.6 प्रतिशत बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये हो गया। घरेलू निवेश, सोने और विदेशी निवेश में वृद्धि इसकी मुख्य वजह रही। केंद्रीय बैंक की शुक्रवार को जारी वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, बही-खाते का आकार 31 मार्च 2025 के 76,25,421.93 करोड़ रुपये से बढ़कर 31 मार्च 2026 को 91,97,121.08 करोड़ रुपये हो गया। यानी इसमें 15,71,699.15 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई।

परिसंपत्तियों में वृद्धि घरेलू निवेश, सोने एवं विदेशी निवेश में क्रमशः 44.9 प्रतिशत, 63.8 प्रतिशत और 7.9 प्रतिशत की वृद्धि के कारण हुई।

रिपोर्ट में कहा गया कि देनदारियों में पुनर्मूल्यांकन खाते, जारी मुद्रा (नोट), जमा और अन्य देनदारियों में क्रमशः 63.4 प्रतिशत, 11.8 प्रतिशत, 11.6 प्रतिशत और 21.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

कुल परिसंपत्तियों में घरेलू परिसंपत्तियों की हिस्सेदारी 31 मार्च 2026 तक 29.1 प्रतिशत और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, सोना (जिसमें स्वर्ण जमा एवं भारत में रखा गया सोना शामिल है) तथा भारत के बाहर वित्तीय संस्थानों को दिए गए ऋण व अग्रिम मिलाकर 70.9 प्रतिशत रही। यह अनुपात 31 मार्च 2025 को क्रमशः 25.7 प्रतिशत और 74.3 प्रतिशत था।

आरबीआई ने कहा, ‘‘ इस (2025-26) दौरान आय में 26.4 प्रतिशत और व्यय में 102.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष के अंत में कुल अधिशेष 2,86,588.46 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 2,68,590.07 करोड़ रुपये की तुलना में 6.7 प्रतिशत अधिक है।’’

आकस्मिक निधि (सीएफ) में 1,09,379.64 करोड़ रुपये का प्रावधान कर स्थानांतरित किया गया, जबकि परिसंपत्ति विकास कोष के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया।

आरबीआई के पास 31 मार्च 2026 तक कुल 880.52 मीट्रिक टन सोना था जो 31 मार्च 2025 के 879.58 मीट्रिक टन की तुलना में 0.94 मीट्रिक टन अधिक है।

इसमें से 312.32 मीट्रिक टन सोना निर्गम विभाग की परिसंपत्ति के रूप में रखा गया जबकि शेष 568.20 मीट्रिक टन बैंकिंग विभाग की परिसंपत्ति के रूप में दर्ज है।

बैंकिंग विभाग के तहत रखे गए सोने (स्वर्ण जमा सहित) का मूल्य 31 मार्च 2025 के 4,31,624.80 करोड़ रुपये से बढ़कर 31 मार्च 2026 को 7,06,162.36 करोड़ रुपये हो गया, जो 63.6 प्रतिशत की वृद्धि है। यह बढ़ोतरी सोने की कीमतों में वृद्धि और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के अवमूल्यन के कारण हुई।

मुद्रा छपाई पर खर्च घटकर 2025-26 में 4,875.20 करोड़ रुपये रह गया जो पिछले वर्ष 6,372.82 करोड़ रुपये था। हालांकि, कर्मचारी लागत 9,146.71 करोड़ रुपये से बढ़कर 10,136.31 करोड़ रुपये हो गई।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा