मुंबई, चार फरवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने बुधवार को द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया।
यह बैठक अर्थव्यवस्था में वृद्धि पर केंद्रित आम बजट और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा की पृष्ठभूमि में हो रही है, जिससे बाजार की धारणा मजबूत हुई है।
मौद्रिक नीति समिति का फैसला शुक्रवार सुबह गवर्नर मल्होत्रा द्वारा घोषित किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना कि भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले फरवरी से अब तक प्रमुख नीतिगत दर रेपो में 1.25 प्रतिशत अंक की कटौती कर दी है और चूंकि फिलहाल न तो वृद्धि और न ही मुद्रास्फीति के मोर्चे पर कोई बड़ी चिंता है, इसलिए इस बार दरों में यथास्थिति बनाए रखी जा सकती है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि उधारी लागत को और कम करने के लिए केंद्रीय बैंक एक और दर कटौती कर सकता है।
बीओएफए ग्लोबल रिसर्च की एक रिपोर्ट में कहा गया कि आरबीआई का दर कटौती चक्र फिलहाल समाप्त होता दिख रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया कि व्यापार समझौते से विकास को लेकर निश्चितता बढ़ेगी और उच्च आवृत्ति संकेतकों में दिख रहा मौजूदा सकारात्मक रुझान आगे भी बना रह सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘हमारा यह भी मानना है कि आरबीआई ने अब ब्याज दरों में कटौती करना बंद कर दिया है, लेकिन वह अपने तरलता प्रावधानों का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करना जारी रखेगा।’
भाषा योगेश अजय
अजय