पाकिस्तान के सिंध प्रांत में जल संकट के कारण चावल उत्पादन हुआ कम

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में जल संकट के कारण चावल उत्पादन हुआ कम

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में जल संकट के कारण चावल उत्पादन हुआ कम
Modified Date: June 7, 2026 / 08:54 pm IST
Published Date: June 7, 2026 8:54 pm IST

कराची, सात जून (भाषा) पाकिस्तान के सिंध प्रांत को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिससे क्षेत्र में चावल उत्पादन को नुकसान पहुंच सकता है और इसकी समग्र निर्यात क्षमता घट सकती है। प्रांत की सत्तारूढ़ पार्टी ने यह जानकारी दी।

सिंध प्रांत में प्रतिवर्ष 55 लाख टन चावल का उत्पादन होता है और इसके निर्यात से 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर की आय होती है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से गैर-बासमती और मोटे चावल का उत्पादन करता है। यहां फसल की कटाई आमतौर पर सितंबर के अंत से अक्टूबर के मध्य तक होती है।

सिंध के सिंचाई विभाग के अनुसार, प्रांत प्रशासन ने इस मौसम में 130,000 क्यूसेक पानी की मांग की थी, लेकिन केवल 100,000 क्यूसेक पानी ही छोड़ा गया है – जिसके कारण कृषि भूमि के बड़े हिस्से में पानी की कमी हो गई है।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सिंध इकाई के अध्यक्ष निसार अहमद खुहरो ने कहा है कि प्रांत वर्तमान में लगभग 30,000 क्यूसेक पानी की कमी का सामना कर रहा है।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी सिंध की सत्तारूढ़ पार्टी है, जिसने लगभग दो दशकों से प्रांतीय सरकार पर अपना दबदबा बनाए रखा है।

खुहरो ने कहा कि स्थानीय समूह संबंधित अधिकारियों को याद दिलाते रहे हैं कि सिंध को 1991 के जल आवंटन समझौते के तहत उसका उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है, क्योंकि सुक्कुर बैराज की दाहिनी नहर प्रणाली वर्तमान में सिंचाई के पानी की गंभीर कमी का सामना कर रही है।

यह समझौता मूल रूप से सिंधु नदी के जल बंटवारे से संबंधित प्रावधानों को दर्शाता है। इस बंटवारे के तहत पाकिस्तान के चार प्रांतों – पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान को पानी की हिस्सेदारी आवंटित की गई है।

खुहरो ने कहा कि पानी की कमी लरकाना और कंबर-शाहदादकोट जिलों के साथ-साथ बलूचिस्तान में कृषि भूमि को प्रभावित कर रही है।

उन्होंने कहा कि इससे दादू कनाल, राइस कनाल और सुक्कुर जिले की सिंचाई नहरें भी प्रभावित हो रही हैं।

सिंध सिंचाई विभाग के सूत्रों के अनुसार, जल संकट का मुख्य कारण पंजाब द्वारा निर्धारित 44,000 क्यूसेक के बजाय 53,394 क्यूसेक पानी का उपयोग करना है। इसके अलावा तौंसा बैराज अपने निर्धारित 24,000 क्यूसेक के हिस्से के मुकाबले 25,694 क्यूसेक पानी उठा रहा है।

भाषा यासिर नरेश

नरेश


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