सही जानकारी उपभोक्ताओं के लिए उत्पाद के बेहतर चयन में मददगार: एफएसएसएआई सीईओ

सही जानकारी उपभोक्ताओं के लिए उत्पाद के बेहतर चयन में मददगार: एफएसएसएआई सीईओ

सही जानकारी उपभोक्ताओं के लिए उत्पाद के बेहतर चयन में मददगार: एफएसएसएआई सीईओ
Modified Date: September 3, 2026 / 08:23 pm IST
Published Date: September 3, 2026 8:23 pm IST

नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) खाद्य नियामक एफएसएसएआई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रजित पुन्हानी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उपभोक्ताओं को खाद्य उत्पादों के बारे में सही जानकारी देना जरूरी है ताकि वे सही चुनाव कर सकें।

यहां एक स्वास्थ्य सम्मेलन को संबोधित करते हुए, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के सीईओ पुन्हानी ने खाद्य सुरक्षा कानूनों को उपभोक्ता शिक्षा और व्यवहार में बदलाव लाने वाले उपायों के साथ जोड़ने की प्राधिकरण की कोशिशों पर जोर दिया।

‘इलनेस टू वेलनेस’ फाउंडेशन ने ‘स्वस्थ राष्ट्र के लिए स्वस्थ पोषण’ विषय पर ‘इलनेस टू वेलनेस’ सम्मेलन आयोजित किया था।

फाउंडेशन के बयान के अनुसार, पुन्हानी ने कहा, ‘‘सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में रोकथाम की ओर एक स्पष्ट बदलाव हो रहा है और भोजन इस बदलाव के केंद्र में है। जहां भोजन का सुरक्षित, पौष्टिक और नियमों के अनुरूप होना एफएसएसएआई की बुनियादी जिम्मेदारी है, वहीं उपभोक्ताओं को सही जानकारी देकर सही चुनाव करने के लिए सशक्त बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।’’

उन्होंने सही खान-पान के चुनाव को बढ़ावा देने की कोशिशों के तहत ‘ईट राइट स्कूल’, ‘ईट राइट कैंपस’ और ‘ईट राइट थाली’ जैसी पहल और उपभोक्ता जागरूकता अभियानों का जिक्र किया।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के पूर्व सचिव राजेश भूषण ने कहा, ‘‘पोषण से जुड़ी समस्याओं का समाधान अलग-अलग उपायों से नहीं किया जा सकता। इसके लिए जीवन-चक्र के नजरिये की जरूरत है, जो गर्भावस्था से शुरू होकर शुरुआती 1,000 दिन, बचपन, स्कूली वर्षों और वयस्क होने तक चलता है।’’

उन्होंने कहा कि चुनौती जागरूकता पैदा करने और फिर उसे स्वस्थ व्यवहार में बदलने की है, खासकर ग्रामीण और कम सुविधा वाले समुदायों में।

स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की उपायुक्त जोया अली रिजवी ने कहा, ‘‘पोषण कार्यक्रमों का असली असर जानकारी को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और समुदायों की जरूरतों को सुनने से ही होगा। हमारे 10.5 लाख आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता इस कोशिश की रीढ़ हैं और उनकी जानकारी के जरिये बातचीत को मजबूत करने से जागरूकता को सार्थक कार्रवाई में बदलने में मदद मिल सकती है।’’

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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