स्वयं सहायता समूहों से आगे आजीविका का दायरा बढ़ाने को भी महिलाओं को मिलेगा कर्ज : चौहान

स्वयं सहायता समूहों से आगे आजीविका का दायरा बढ़ाने को भी महिलाओं को मिलेगा कर्ज : चौहान

स्वयं सहायता समूहों से आगे आजीविका का दायरा बढ़ाने को भी महिलाओं को मिलेगा कर्ज : चौहान
Modified Date: September 3, 2026 / 08:03 pm IST
Published Date: September 3, 2026 8:03 pm IST

मुंबई, तीन सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र में एक करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य के साथ केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बृहस्पतिवार को कहा कि ऋण सिर्फ स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन महिलाओं को भी दिए जाएंगे जो अपनी आजीविका का दायरा बढ़ाना चाहती हैं।

कृषि और किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री चौहान ने बैंकों और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ समीक्षा बैठक के बाद कहा, ‘‘विकसित भारत बनाने के लिए महिला सशक्तीकरण एक बड़ी जरूरत है। आज की बैठक सिर्फ एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि उस दिशा में आगे बढ़ने की एक गंभीर कोशिश थी। इसलिए, ऋण न केवल स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को दिए जाएंगे, बल्कि व्यक्तिगत महिला सदस्यों को भी उधार लेने की सुविधा दी जाएगी ताकि वे नए मौके बना सकें और अपनी आजीविका बढ़ा सकें।’’

प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के तहत, पांच साल में स्वयं सहायता समूहों को 10 लाख करोड़ रुपये और व्यक्तिगत महिलाओं को एक लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया जाएगा। चौहान ने विभिन्न एसएचजी की महिलाओं से बातचीत भी की और बैंकिंग प्रक्रियाओं तथा कर्ज मिलने में आ रही दिक्कतों और शिकायतों को सुना।

उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के छह करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने के सपने को पूरा करने के लिए पांच साल का प्रारूप तैयार किया है, जिसमें से लगभग 3.5 करोड़ महिलाएं पहले ही ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।

चौहान ने कहा कि सरकार ने महाराष्ट्र के लिए एक करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा है।

चौहान ने बताया कि महिलाओं को अक्सर ऋण की औपचारिकताएं पूरी करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, खासकर दूरदराज और पहाड़ी इलाकों में जहां बैंक शाखाएं दूर होती हैं और सभी औपचारिकताएं एक बार में पूरी नहीं हो पातीं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें उस स्तर पर उन्हें प्रशिक्षण देने और जागरूक करने पर ध्यान देना चाहिए। सबसे पहले, एसआरएलएम (राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) की नियमित बैठकें होनी चाहिए और बैंकों को उनमें गंभीरता से हिस्सा लेना चाहिए।’’

चौहान ने आगे भरोसा दिलाया कि हेल्पलाइन, प्रक्रिया में सुधार और बैंकरों के साथ लगातार तालमेल के जरिये हर रुकावट को दूर किया जाएगा, ताकि ‘दीदियों’ को बैंक ऋण लेने में कोई परेशानी न हो।

मंत्री ने कहा, ‘‘अब यह तय किया गया है कि सभी बैंकों में ऋण की प्रक्रियाओं को एक जैसा किया जाए। भारतीय रिजर्व बैंक और नाबार्ड एक जैसी प्रक्रिया तय करने के लिए काम करेंगे ताकि महिलाओं को अलग-अलग बैंकों में बार-बार न जाना पड़े या अलग-अलग प्रक्रियाओं से न गुजरना पड़े।’’

चौहान ने कहा कि सरकार ने बैंकों के लिए लक्ष्य तय किए थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 के लिए न सिर्फ लक्ष्य हासिल किए गए, बल्कि कई बैंकों ने अपने लक्ष्यों से 1.5 गुना ज्यादा काम किया।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने जो हासिल किया है, उस पर वाकई गर्व किया जा सकता है। इस साल लगभग हर बैंक ने अपने लक्ष्य का डेढ़ गुना हासिल किया है, कुछ ने तो इसे दोगुना भी कर लिया है। इसके लिए बहुत-बहुत बधाई, लेकिन आगे भी हमें पूरे जोश के साथ काम करते रहना होगा।’’

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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