नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी से आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजधानी में फल और सब्जियों के दाम प्रभावित हो सकते हैं। दिल्ली के आजादपुर मंडी के व्यापारियों ने सोमवार को यह कहा।
तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने सोमवार को पेट्रोल की कीमतों में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। यह दो हफ्तों से भी कम समय में चौथी बढ़ोतरी है।
आजादपुर मंडी फेडरेशन ऑफ फ्रूट एंड वेजिटेबल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि थोक कीमतों पर अब तक कोई तत्काल असर नहीं पड़ा है, लेकिन ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से अंततः दाम प्रभावित हो सकते हैं।
शर्मा ने कहा, ‘‘सोमवार तक कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें और बढ़ सकती हैं, इसलिए हमें कुछ असर देखने को मिल सकता है। हालांकि कीमतों में छोटी-मोटी बढ़ोतरी से हमेशा थोक कीमतों पर तुरंत असर नहीं पड़ता, लेकिन ईंधन की कीमतों में कुल मिलाकर बड़ी बढ़ोतरी से निश्चित रूप से दाम बढ़ेंगे।’’
वेजिटेबल ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव अनिल मल्होत्रा के अनुसार, परिवहन लागत में किसी भी बढ़ोतरी का सीधा असर दिल्ली आने वाले फलों और सब्जियों की कीमतों पर पड़ेगा।
मल्होत्रा ने कहा, ‘‘देश के हर हिस्से से फसल, फलों और सब्जियों को दिल्ली लाने के लिए ट्रकों का इस्तेमाल किया जाता है। लोडर इन ट्रकों को किराए पर लेते हैं और जैसे-जैसे इंधन की कीमतें बढ़ेंगी, इसका असर निश्चित रूप से परिवहन लागत पर पड़ेगा।’’
हालांकि, शर्मा ने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी की सीमा इस बात पर निर्भर करेगी कि ट्रांसपोर्टर ट्रकों का किराया कितना बढ़ाते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम अभी कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी का अनुमान नहीं लगा सकते, क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ट्रकों का किराया कितना बढ़ता है।’’
आजादपुर मंडी में टमाटर बेचने वाले दिलीप कुमार ने कहा कि खुदरा विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को आमतौर पर तब असर महसूस होना शुरू होता है, जब ट्रांसपोर्टर माल ढुलाई के शुल्क में बदलाव करते हैं।
कुमार ने कहा, ‘‘अगर डीजल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो ट्रांसपोर्टर ज्यादा शुल्क लेंगे और वह लागत अंततः मंडी तक पहुंच जाएगी। अगर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही, तो अगले कुछ दिनों में खुदरा कीमतें थोड़ी बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।’’
मंडी के विक्रेताओं ने यह भी कहा कि लॉजिस्टिक (परिवहन) खर्चों में होने वाली किसी भी बढ़ोतरी का बोझ अंततः खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के जरिए उपभोक्ताओं पर ही डाला जाता है।
भाषा राजेश राजेश रमण
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