मुंबई, तीन जून (भाषा) अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) द्वारा श्रम उल्लंघनों का हवाला देते हुए भारतीय आयात पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने के प्रस्ताव के बाद बुधवार को रुपया 31 पैसे टूटकर 95.67 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि डॉलर की मजबूत मांग, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, अमेरिका-ईरान के बीच तनाव और विदेशी कोषों की भारी निकासी ने भी निवेशकों के विश्वास को और कमजोर कर दिया है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.43 के भाव पर खुला और कारोबार के दौरान 95.80 के निचले स्तर पर रहा और कारोबार के अंत में 95.67 (अस्थायी) पर रहा, जो पिछले बंद भाव से 31 पैसे की गिरावट है।
मंगलवार को रुपया 95.36 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने और शांति वार्ता रुकने के बीच यूएसटीआर की कार्रवाई ने निवेशकों के जोखिम लेने की धारणा पर नकारात्मक असर डाल रही है।
यूएसटीआर ने बंधुआ मजदूरी से निर्मित उत्पादों के आयात पर रोक लगाने में विफल रहने के आरोप में भारत समेत 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है।
इस बीच, निवेशकों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक तीन से पांच जून तक निर्धारित है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय एमपीसी पांच जून को अपने निर्णयों की घोषणा करेगी।
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.13 प्रतिशत बढ़कर 99.34 पर रहा।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 2.76 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 98.65 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 303.67 अंक घटकर 74,346.17 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 77.95 अंक गिरकर 23,405.60 अंक पर रहा।
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को शुद्ध रूप से 8,362.92 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
भाषा यासिर अजय
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