सेबी ने एफपीआई को गैर-कृषि जिंस डेरिवेटिव में भागीदारी की अनुमति दी, निपटान व्यवस्था बदली

सेबी ने एफपीआई को गैर-कृषि जिंस डेरिवेटिव में भागीदारी की अनुमति दी, निपटान व्यवस्था बदली

सेबी ने एफपीआई को गैर-कृषि जिंस डेरिवेटिव में भागीदारी की अनुमति दी, निपटान व्यवस्था बदली
Modified Date: September 24, 2026 / 10:00 pm IST
Published Date: September 24, 2026 10:00 pm IST

मुंबई, 24 सितंबर (भाषा) पूंजी बाजार नियामक सेबी ने बृहस्पतिवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को भौतिक रूप से निपटाए जाने वाले गैर-कृषि जिंस डेरिवेटिव अनुबंधों में भाग लेने की अनुमति देने का फैसला किया।

इसके साथ ही नियामक ने निपटान व्यवस्था में बदलाव करते हुए 10 लाख रुपये तक की निपटान राशि वाले मामलों के लिए त्वरित प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने निदेशक मंडल की बैठक के बाद जारी बयान में कहा कि एफपीआई की भागीदारी से जिंस डेरिवेटिव बाजार में संस्थागत भागीदारी और तरलता बढ़ाने, बेहतर मूल्य निर्धारण में मदद करने तथा डेरिवेटिव एवं वास्तविक जिंस बाजार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी।

नियामक ने कहा कि एफपीआई गैर-कृषि सूचकांक डेरिवेटिव अनुबंधों में भाग ले सकेंगे, चाहे संबंधित अनुबंध का निपटान नकद में होता हो या नहीं। इसके अलावा उन्हें गैर-नकदी तरीके से निपटाए जाने वाले गैर-कृषि जिंस डेरिवेटिव अनुबंधों में भी भाग लेने की अनुमति होगी।

हालांकि, भौतिक रूप से निपटाए जाने वाले गैर-कृषि जिंस डेरिवेटिव में भाग लेने वाले एफपीआई को डिलिवरी की बाध्यता शुरू होने से पहले अपनी स्थिति से बाहर निकलना होगा। उन्हें अनुबंध की समाप्ति से कम-से-कम तीन दिन पहले अपनी स्थिति समाप्त करनी होगी। इस अवधि में वे अपनी स्थिति बढ़ा भी नहीं सकेंगे।

सेबी ने कहा कि किसी एफपीआई को एक्सचेंज पर कारोबार की अनुमति मिलने से पहले अपने ट्रेडिंग सदस्य या ट्रेडिंग-कम-क्लियरिंग सदस्य के साथ समझौता करना होगा। इसमें डिलिवरी अवधि शुरू होने से पहले एफपीआई की खुली स्थिति को समाप्त करने या उसे संबंधित सदस्य को हस्तांतरित करने की व्यवस्था होगी।

निदेशक मंडल ने निपटान व्यवस्था में व्यापक बदलाव को भी मंजूरी दी। नई व्यवस्था में निपटान की शर्तों में निपटान राशि, जहां लागू हो वहां गलत तरीके से हासिल लाभ की वापसी तथा सुधारात्मक एवं नियामकीय शर्तें शामिल होंगी। पहले इन्हें गैर-मौद्रिक शर्तों के रूप में जाना जाता था।

निपटान राशि की गणना के लिए नया फॉर्मूला होगा। इसमें उल्लंघन के लिए प्रतिभूति कानूनों के तहत निर्धारित न्यूनतम जुर्माने से जुड़ी आधार राशि को कार्यवाही के चरण, नियामकीय कार्रवाई, उल्लंघन की गंभीरता और अन्य संबंधित कारकों के आधार पर समायोजित किया जाएगा।

नियामक ने मौद्रिक सीमा और उल्लंघन की प्रकृति के आधार पर त्वरित निपटान की व्यवस्था भी शुरू की है। मौद्रिक सीमा के तहत 10 लाख रुपये से अधिक नहीं होने वाली निपटान राशि वाले मामले आंतरिक समिति से सीधे पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल के पास भेजे जाएंगे।

सेबी ने मान्यता-प्राप्त निवेशकों का दायरा बढ़ाने का फैसला भी किया। अब प्रतिभूति बाजार में पांच करोड़ रुपये की संपत्ति वाले व्यक्ति और 20 करोड़ रुपये की ऐसी संपत्ति वाली कंपनियां भी पात्र होंगी।

सेबी ने शेयर ब्रोकर, म्यूचुअल फंड, निवेश सलाहकार और पोर्टफोलियो प्रबंधकों समेत बाजार मध्यस्थों के लिए साझा विज्ञापन संहिता को भी मंजूरी दी। इसके तहत ब्रांड या संस्था के प्रचार के लिए नामचीन हस्तियों का इस्तेमाल किया जा सकेगा, लेकिन किसी विशिष्ट वित्तीय उत्पाद या सेवा का प्रचार नहीं किया जा सकेगा।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


लेखक के बारे में