सेबी ने बाजार मध्यस्थों के लिए ‘योग्य और उपयुक्त व्यक्ति’ रूपरेखा में सुधार के प्रस्ताव को मंजूरी दी

सेबी ने बाजार मध्यस्थों के लिए 'योग्य और उपयुक्त व्यक्ति’ रूपरेखा में सुधार के प्रस्ताव को मंजूरी दी

सेबी ने बाजार मध्यस्थों के लिए ‘योग्य और उपयुक्त व्यक्ति’ रूपरेखा में सुधार के प्रस्ताव को मंजूरी दी
Modified Date: March 23, 2026 / 10:19 pm IST
Published Date: March 23, 2026 10:19 pm IST

मुंबई, 23 मार्च (भाषा) सेबी के निदेशक मंडल ने सोमवार को बाजार मध्यस्थों के लिए ‘योग्य और उपयुक्त व्यक्ति’ रूपरेखा में व्यापक सुधार के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस पहल का मकसद नियामक प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता और निष्पक्षता लाना है।

इस प्रस्ताव में आर्थिक अपराध मामलों में एफआईआर, शिकायत या आरोप पत्र दाखिल होने पर स्वतः अयोग्य घोषित होने की व्यवस्था को समाप्त करना शामिल है।

नियामक ने कहा, ‘‘सेबी द्वारा दायर आपराधिक शिकायत/एफआईआर या आर्थिक अपराधों से संबंधित आरोप पत्र के लंबित होने का नियम-आधारित मानदंड, अपने आप में, स्वतः अयोग्य घोषित होने का आधार नहीं होगा। हालांकि, मौजूदा सिद्धांत-आधारित मानदंड मामला-दर-मामला लागू होगा।’’

सेबी ने कहा कि नैतिक मानकों के उल्लंघन से जुड़े अपराध में दोष सिद्ध होने पर मौजूदा अयोग्यता का दायरा बढ़ाकर इसमें किसी भी आर्थिक अपराध या प्रतिभूति कानून के तहत किसी भी अपराध में दोषसिद्धि को भी शामिल किया जाएगा।

स्वीकृत संशोधनों का उद्देश्य सिद्धांत-आधारित मानदंडों के नियामक उद्देश्य को उचित रूप से संतुलित करना है। इसके तहत केवल ‘ईमानदारी, निष्ठा, नैतिक व्यवहार, प्रतिष्ठा, निष्पक्षता और चरित्र वाले व्यक्ति ही प्रतिभूति बाजार में काम कर सकते हैं’ और बाजार प्रतिभागियों के लिए व्यापार करने में सुगमता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी पूरा करना है।

सेबी ने कहा कि परिसमापन कार्यवाही शुरू करने को अयोग्यता के आधार के रूप में शामिल नहीं किया जाएगा। हालांकि, परिसमापन आदेश पर अयोग्यता का मौजूदा प्रावधान बना रहेगा।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा, ‘‘मान्यता प्राप्त शेयर बाजारों के आवेदक/मध्यस्थ को किसी भी घटना के घटित होने पर, जिसमें स्वयं, उसके प्रमुख मध्यस्थ या नियंत्रण में शामिल व्यक्ति शामिल हों, 15 कार्य दिवसों के भीतर सेबी को सूचित करना आवश्यक होगा।’’

इसके अलावा, सेबी नियमों में सुनवाई के अधिकार को स्पष्ट रूप से शामिल करने पर विचार कर रहा है। हालांकि, सुनवाई का उचित अवसर देने की व्यवस्था पहले से मौजूद है, बोर्ड ने प्रक्रियात्मक अस्पष्टता को दूर करने के लिए इसे नियमों में स्पष्ट रूप से बताने का निर्णय लिया है।

इसके अनुसार, किसी व्यक्ति को सुनवाई का उचित अवसर दिए जाने के बाद ही ‘अयोग्य’ घोषित किया जा सकता है।

नियामक ने पंजीकरण के लिए आवेदन करने हेतु ‘डिफॉल्ट’ पांच वर्ष की अपात्रता अवधि को भी हटाने का निर्णय लिया है। सेबी के आदेश में कोई समय अवधि निर्धारित नहीं होती है। इससे, अपात्रता केवल आदेश में उल्लेखित अवधि के लिए लागू होगी।

इसके अतिरिक्त, कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद पंजीकरण आवेदन पर विचार न करने की अवधि को एक वर्ष से घटाकर छह महीने करने का प्रस्ताव है, ताकि आवेदकों के लिए लंबे समय तक अनिश्चितता की स्थिति से बचा जा सके।

सेबी बोर्ड ने व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए, बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट (इनविट) और रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) को नियंत्रित करने वाले नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है।

वर्तमान में, इनविट के अंतर्गत विशेष उद्देश्यीय इकाई (एसपीवी) को अपनी परिसंपत्तियों का कम से कम 90 प्रतिशत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश करना अनिवार्य है। रियायती समझौते की समाप्ति पर, एसवपीवी में बुनियादी ढांचा परियोजना का अस्तित्व समाप्त हो जाता है।

हालांकि, लंबित दावों, मुकदमों, कर निर्धारण, रियायती समझौते के तहत समयसीमा आदि के कारण तत्काल बिक्री या परिसमापन व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होने के कारण इनविट को ऐसे विशेष उद्देश्यीय इकाई में निवेश बनाए रखना पड़ सकता है।

इस समस्या के समाधान के लिए, इनविट को रियायती समझौते की समाप्ति या समापन के बाद भी एसपीवी में निवेश बनाए रखने की अनुमति दी जाएगी। सेबी ने कहा कि इनविट को रियायती समझौते की समाप्ति, लंबित दावों/मुकदमों के समापन, या समय अवधि की समाप्ति, इनमें से जो भी बाद में हो, उसके एक वर्ष के भीतर या तो ऐसे एसपीवी में निवेश समाप्त करना होगा या ऐसे एसपीवी में एक नई अवसंरचना परियोजना का अधिग्रहण करना होगा।

भाषा रमण अजय

अजय


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