सेबी ने म्यूचुअल फंड के लिए कारोबारी सत्र के दौरान उधारी के नियमों को आसान बनाया

सेबी ने म्यूचुअल फंड के लिए कारोबारी सत्र के दौरान उधारी के नियमों को आसान बनाया

सेबी ने म्यूचुअल फंड के लिए कारोबारी सत्र के दौरान उधारी के नियमों को आसान बनाया
Modified Date: July 10, 2026 / 10:22 pm IST
Published Date: July 10, 2026 10:22 pm IST

नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंड उद्योग को राहत देते हुए करोबारी सत्र के दौरान ली और चुकाई जाने वाली ‘इंट्राडे’ उधारी के दायरे का विस्तार किया है। नए नियम एक सितंबर से लागू होंगे।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शुक्रवार को संशोधित ढांचा जारी किया। इसके पहले तीन जुलाई को सेबी (म्यूचुअल फंड) विनियमन, 2026 में संशोधनों को अधिसूचित किया गया था।

पहले, म्यूचुअल फंड को केवल अस्थायी नकदी जरूरतों को पूरा करने के लिए ही उधार लेने की अनुमति थी और वह भी नियामकीय सीमाओं के तहत करना होता था।

संशोधित ढांचे के तहत, अब म्यूचुअल फंड योजनाओं का संचालन करने वाली परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियां (एएमसी) इस उधारी का इस्तेमाल निवेश के भुगतान, रोजाना के नफा-नुकसान समायोजन, विदेशी लेनदेन निपटान और पुराना कर्ज चुकाने जैसे कामों में भी कर सकेंगी।

नियामक के अनुसार, यह कदम विभिन्न बाजारों के अलग-अलग निपटान समय के कारण उत्पन्न होने वाले नकदी असंतुलन को दूर करने के लिए उठाया गया है।

सेबी ने स्पष्ट किया कि एएमसी दिन के दौरान मिलने वाली संभावित प्राप्तियों के आधार पर उधारी ले सकती हैं। इनमें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), समाशोधन निगम और निवेशकों से प्राप्त होने वाली राशि जैसे सुनिश्चित स्रोत शामिल हैं।

हालांकि, सेबी ने सख्त शर्त रखी है कि सभी ‘इंट्राडे’ यानी कारोबारी सत्र के दौरान लिए गए उधार उसी दिन चुकानी होंगी। यदि कोई उधारी अगले दिन तक जारी रहती है, तो उसे ओवरनाइट उधारी माना जाएगा और उस पर नियामकीय सीमाएं लागू होंगी।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण


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