मुंबई, 12 फरवरी (भाषा) सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बृहस्पतिवार को कहा कि पूंजी बाजार नियामक विभिन्न उपायों के जरिये विनियमन की लागत कम करने पर विचार कर रहा है।
उन्होंने बताया कि इन प्रयासों में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन शामिल है, जो नियामकीय कदमों के प्रभाव का आकलन करेगी। इसके अलावा, राष्ट्रीय प्रतिभूति बाजार संस्थान (एनआईएसएम) में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में स्थापित किया जा रहा नियामकीय अध्ययन केंद्र भी इस दिशा में काम कर रहा है।
पांडेय ने कहा कि सेबी का आर्थिक और नीति विश्लेषण विभाग (डीईपीए) इस मामले में काम कर रहा है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्रमुख ने इस विषय को अभी शुरुआती चरण में बताते हुए कहा कि नियामकीय प्रभाव आकलन करने की आवश्यकता है, जिसमें उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नीतिगत परिणामों का अध्ययन शामिल होगा।
पांडेय ने कहा, ‘‘हमारे सभी उपायों की लागत-दक्षता महत्वपूर्ण है।’’ उन्होंने कहा कि अधिक लागत हमें गैर-प्रतिस्पर्धी बना सकती है।
उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुछ समय पहले इस तरह के प्रयास शुरू करने का जिक्र किया था।
यह पूछे जाने पर कि क्या रिजर्व बैंक ने भी इसे प्राथमिकता क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया है और क्या वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) ने इस पर चर्चा की है, तो उन्होंने इसका सकारात्मक जवाब दिया।
पांडेय ने कहा कि सेबी का दृष्टिकोण बाजार की अखंडता और निवेशक संरक्षण के प्रति सतर्क रहते हुए नवाचार को प्रोत्साहित करना रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि नवाचार जोखिम रहित नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि पूंजी बाजार के नजरिये से कृत्रिम मेधा से उत्पन्न जोखिमों का अध्ययन करने की भी आवश्यकता है और शोधकर्ताओं से नियामक निकायों के साथ साझेदारी करने का आग्रह किया।
पांडेय ने कहा कि लोगों के लिए वित्तीय सेवाओं तक पहुंच में सुधार लाने पर भी काम करने की जरूरत है।
इस महीने की शुरुआत में एनएसडीएल में हुई तकनीकी खराबी के बारे में पूछे जाने पर, पांडेय ने कहा कि यह एक तकनीकी गड़बड़ी थी। मूल कारण विश्लेषण और अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक समाधानों को लागू करने के लिए सामान्य प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा।
एनएसडीएल में हुई तकनीकी गड़बड़ी के कारण व्यापार निपटान प्रभावित हुआ था।
भाषा रमण अजय
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